अल-मआरिज · 1/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ ۝١
Sa ala saaa`ilum bi`azaa binw-waaqi
📖 हिंदी अर्थ
एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَأَلَ سَائِلٌ – एक प्रश्नकर्ता ने प्रश्न किया (यहाँ 'सअला' का अर्थ 'दुआ' या 'प्रश्न' दोनों हो सकता है, परन्तु यहाँ अधिकांश मुफ़स्सिरीन के अनुसार इसका अर्थ दुआ और माँगना है)।
  • بِعَذَابٍ وَاقِعٍ – उस अज़ाब (यातना) के बारे में जो नाज़िल होने वाला और अटल है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस घटना का ज़िक्र कर रहे हैं जब कुछ मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने मज़ाक़ और उपहास के तौर पर कहा था कि "अगर यह अज़ाब सच में आने वाला है तो हमारे ऊपर ला कर गिरा दो।" उन्होंने अपनी ज़ुबान से अपने ऊपर और अपनी क़ौम पर अज़ाब की दुआ माँगी, लेकिन यह दुआ उनके दिल से नहीं निकली थी, बल्कि यह उनका मज़ाक़ और ठट्ठा था।

अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि यह अज़ाब "वाक़ि' (अटल और नाज़िल होने वाला) है, यानी यह निश्चित रूप से आएगा और इसे कोई टाल नहीं सकता। यह अज़ाब क़यामत के दिन उन पर नाज़िल होगा, जब कोई बचाव नहीं होगा।

इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है कि अल्लाह की यातना से मज़ाक़ नहीं करना चाहिए। जो लोग अल्लाह के वादों को झुठलाते हैं और उनका उपहास करते हैं, वे अंततः अपने किए की सज़ा पाएँगे। अल्लाह की यातना सच्ची है, और उसका आना निश्चित है।

लेकिन साथ ही, यह आयत मोमिनीन के लिए एक बशारत (खुशखबरी) भी है कि अल्लाह का अज़ाब केवल उन्हीं पर आएगा जो हक़ (सत्य) का इनकार करें और ज़ुल्म करें। जो लोग ईमान लाएँ और अच्छे कर्म करें, उनके लिए अल्लाह की रहमत और जन्नत है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेअमतों पर शुक्र करें, उसकी यातना से डरें, और उसकी रहमत की उम्मीद रखें। अल्लाह बहुत दयालु है, लेकिन वह बहुत सख्त सज़ा देने वाला भी है। हमें अपने जीवन को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में बिताना चाहिए ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो क़यामत के दिन इनकार करने वालों पर आएगा।



📜 आयत 1-3 — सूरा अल-मआरिज

1سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ
एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा
2لِّلْكَافِرِينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌ
जिसको कोई टाल नहीं सकता
3مِّنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 1

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Thursday, October 1, 2026

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