अल-मआरिज · 38/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
أَيَطْمَعُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ ۝٣٨
Ayatma`u kullum ri`im minhum anyyudkhala jannata Na`eem
📖 हिंदी अर्थ
क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَيَطْمَعُ: क्या वह लालच रखता है / क्या वह आशा रखता है
  • كُلُّ امْرِئٍ: हर एक व्यक्ति
  • مِّنْهُمْ: उनमें से (काफिरों में से)
  • أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ: कि उसे नेमतों वाली जन्नत में दाखिल किया जाए

तफसीर:

यह आयत उन काफिरों की निंदा कर रही है जो दुनिया में अपने ऐशो-आराम और माल-दौलत को देखकर यह ख्याल कर बैठे थे कि अगर आखिरत में जन्नत है तो वही उसके हकदार हैं। वे घमंड और अहंकार में कहते थे कि अल्लाह ने हमें दुनिया में यह सब कुछ दिया है, तो आखिरत में भी हमें ही जन्नत मिलेगी। वे सोचते थे कि उनकी दुनियावी खुशहाली उनके लिए अल्लाह की रजामंदी की निशानी है।

अल्लाह तआला इस आयत में उनके इस झूठे ख्याल और बेबुनियाद उम्मीद पर सवाल उठाते हुए फरमाता है: क्या उनमें से हर एक शख्स यह लालच रखता है कि उसे नेमतों से भरी जन्नत में दाखिल कर दिया जाए? यानी क्या वे सच में यह समझते हैं कि जन्नत इतनी सस्ती है कि बिना ईमान और अच्छे आमाल के, सिर्फ दुनियावी दौलत के दम पर मिल जाएगी?

यह उनकी नादानी और जहालत की इंतिहा है कि वे कुफ्र और नाफरमानी पर कायम हैं, अल्लाह के रसूल को झुठला रहे हैं, और फिर भी जन्नत की उम्मीद रखते हैं। जन्नत उन लोगों के लिए है जो अल्लाह पर ईमान लाएं, उसके रसूल की पैरवी करें, और नेक आमाल करें। यह सिर्फ दुनियावी अमीरी और ऐशो-आराम का इनाम नहीं है।

अल्लाह तआला ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने उन्हें उसी कमजोर पानी (नुत्फा) से पैदा किया है जिससे बाकी इंसानों को पैदा किया। वे किसी बड़े और खास मकाम पर नहीं हैं। उनकी पैदाइश किसी और इंसान से बेहतर नहीं थी, लेकिन उन्होंने ईमान नहीं लाया। तो फिर वे किस बिना पर जन्नत की उम्मीद करते हैं? क्या उनके पास कोई ऐसा अमल है जो उन्हें जन्नत का हकदार बनाए?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के यहां जन्नत पाने का जरिया सिर्फ और सिर्फ ईमान और नेक अमल है। दुनिया की दौलत, ओहदा, खानदान या नस्ल कोई मायने नहीं रखती। जो शख्स जितना अल्लाह के करीब होगा, उतना ही जन्नत का हकदार होगा। आज हमें भी यह सोचना चाहिए कि हमारी उम्मीदें और हमारे आमाल में कितना ताल्लुक है। क्या हम सिर्फ जुबान से जन्नत की तमन्ना करते हैं या फिर अपने आमाल से उसकी तैयारी भी करते हैं?

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है, उसने जन्नत का रास्ता आसान कर दिया है—बस ईमान लाओ, नेक अमल करो, और अपने गुनाहों से तौबा करो। यही वह रास्ता है जो हमें उस नेमतों भरी जन्नत तक पहुंचाएगा जिसकी कोई आंख ने नहीं देखी, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने ख्याल नहीं किया।



📜 आयत 36-40 — सूरा अल-मआरिज

36فَمَالِ الَّذِينَ كَفَرُوا قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ
तो (ऐ रसूल) काफिरों को क्या हो गया है
37عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ عِزِينَ
कि तुम्हारे पास गिरोह गिरोह दाहिने से बाएँ से दौड़े चले आ रहे हैं
38أَيَطْمَعُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ
क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा
39كَلَّا ۖ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ
हरगिज़ नहीं हमने उनको जिस (गन्दी) चीज़ से पैदा किया ये लोग जानते हैं
40فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ
तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 38

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Thursday, October 1, 2026

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