Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَيَطْمَعُ: क्या वह लालच रखता है / क्या वह आशा रखता है
- كُلُّ امْرِئٍ: हर एक व्यक्ति
- مِّنْهُمْ: उनमें से (काफिरों में से)
- أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ: कि उसे नेमतों वाली जन्नत में दाखिल किया जाए
तफसीर:
यह आयत उन काफिरों की निंदा कर रही है जो दुनिया में अपने ऐशो-आराम और माल-दौलत को देखकर यह ख्याल कर बैठे थे कि अगर आखिरत में जन्नत है तो वही उसके हकदार हैं। वे घमंड और अहंकार में कहते थे कि अल्लाह ने हमें दुनिया में यह सब कुछ दिया है, तो आखिरत में भी हमें ही जन्नत मिलेगी। वे सोचते थे कि उनकी दुनियावी खुशहाली उनके लिए अल्लाह की रजामंदी की निशानी है।
अल्लाह तआला इस आयत में उनके इस झूठे ख्याल और बेबुनियाद उम्मीद पर सवाल उठाते हुए फरमाता है: क्या उनमें से हर एक शख्स यह लालच रखता है कि उसे नेमतों से भरी जन्नत में दाखिल कर दिया जाए? यानी क्या वे सच में यह समझते हैं कि जन्नत इतनी सस्ती है कि बिना ईमान और अच्छे आमाल के, सिर्फ दुनियावी दौलत के दम पर मिल जाएगी?
यह उनकी नादानी और जहालत की इंतिहा है कि वे कुफ्र और नाफरमानी पर कायम हैं, अल्लाह के रसूल को झुठला रहे हैं, और फिर भी जन्नत की उम्मीद रखते हैं। जन्नत उन लोगों के लिए है जो अल्लाह पर ईमान लाएं, उसके रसूल की पैरवी करें, और नेक आमाल करें। यह सिर्फ दुनियावी अमीरी और ऐशो-आराम का इनाम नहीं है।
अल्लाह तआला ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने उन्हें उसी कमजोर पानी (नुत्फा) से पैदा किया है जिससे बाकी इंसानों को पैदा किया। वे किसी बड़े और खास मकाम पर नहीं हैं। उनकी पैदाइश किसी और इंसान से बेहतर नहीं थी, लेकिन उन्होंने ईमान नहीं लाया। तो फिर वे किस बिना पर जन्नत की उम्मीद करते हैं? क्या उनके पास कोई ऐसा अमल है जो उन्हें जन्नत का हकदार बनाए?
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के यहां जन्नत पाने का जरिया सिर्फ और सिर्फ ईमान और नेक अमल है। दुनिया की दौलत, ओहदा, खानदान या नस्ल कोई मायने नहीं रखती। जो शख्स जितना अल्लाह के करीब होगा, उतना ही जन्नत का हकदार होगा। आज हमें भी यह सोचना चाहिए कि हमारी उम्मीदें और हमारे आमाल में कितना ताल्लुक है। क्या हम सिर्फ जुबान से जन्नत की तमन्ना करते हैं या फिर अपने आमाल से उसकी तैयारी भी करते हैं?
अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है, उसने जन्नत का रास्ता आसान कर दिया है—बस ईमान लाओ, नेक अमल करो, और अपने गुनाहों से तौबा करो। यही वह रास्ता है जो हमें उस नेमतों भरी जन्नत तक पहुंचाएगा जिसकी कोई आंख ने नहीं देखी, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने ख्याल नहीं किया।
📜 आयत 36-40 — सूरा अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 38
सूरा अल-मआरिज आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि…सूरा आयत 38/44 — सूरा अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मआरिज सुनें, सूरा अल-मआरिज अनुवाद, सूरा अल-मआरिज mp3, सूरा अल-मआरिज pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मआरिज
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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