अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضَرًّا (ज़र्रन): नुक़सान, बुराई, तकलीफ़
- رَشَدًا (रशदन): भलाई, हिदायत, नेकी, फ़ायदा
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए कि मैं तुम्हारे लिए न किसी नुक़सान का मालिक हूँ और न किसी भलाई का। यानी मेरे पास न तो यह ताक़त है कि अगर अल्लाह ने तुम्हारे लिए कोई बुराई या तकलीफ़ मुक़द्दर कर दी हो तो मैं उसे तुमसे टाल दूँ, और न ही मैं यह अख़्तियार रखता हूँ कि अगर अल्लाह ने तुम्हें कोई भलाई या हिदायत न दी हो तो मैं तुम्हें वह दे दूँ। यह सब कुछ सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला ही के इख़्तियार में है। वही नुक़सान पहुँचाने वाला है और वही भलाई देने वाला है।
असल में यह आयत मुशरिकीन और काफ़िरों के उस इल्ज़ाम का जवाब है जो वह नबी करीम ﷺ पर लगाते थे कि आप अपनी तरफ़ से कुछ लाते हैं। अल्लाह ने अपने नबी को सिखाया कि आप साफ़ कह दें कि मैं तो सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने वाला हूँ। मेरा काम सिर्फ़ यह है कि जो हुक्म अल्लाह ने मुझे दिया है, उसे तुम तक पहुँचा दूँ। हिदायत देना, दिलों को बदलना, नुक़्सान पहुँचाना या फ़ायदा देना — यह सब अल्लाह ही के क़ब्ज़े में है।
और यह भी याद रखिए कि अगर मैं अल्लाह की नाफ़रमानी करूँ तो अल्लाह के अज़ाब से मुझे भी कोई नहीं बचा सकता और न ही उसके सिवा मेरे लिए कोई पनाह की जगह है। इसलिए मैं भी उसी तरह अल्लाह के हुक्म का पाबंद हूँ जैसे तुम्हें उसका पाबंद होना चाहिए। जो शख्स अल्लाह और उसके रसूल की नाफ़रमानी करेगा और अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ेगा, उसकी सज़ा जहन्नुम की आग है जिसमें वह हमेशा रहेगा और कभी निकल नहीं पाएगा।
दावती पहलू:
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक़ है। यह हमें सिखाती है कि हमें अपनी ताक़त और इख़्तियार पर नाज़ नहीं करना चाहिए। सारी कुदरत और सारा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। जब हम यह समझ लेंगे कि नुक़्सान और फ़ायदा, तकलीफ़ और राहत — सब कुछ अल्लाह ही के हाथ में है, तो हमारा दिल सिर्फ़ अल्लाह से जुड़ेगा, सिर्फ़ उसी से डरेगा और सिर्फ़ उसी से उम्मीद रखेगा। यही तो इंसान की सबसे बड़ी कामयाबी है कि वह अपने रब के सामने अपनी बेबसी और लाचारी का इक़रार करे और उसी की तरफ़ रुजू करे। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद प्यार करता है और जो उसकी तरफ़ एक क़दम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ़ दौड़कर आता है।
📜 आयत 19-23 — अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 21
सूरा अल-जिन्न आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये भी) कह दो कि मैं तुम्हारे हक़ में न…सूरा आयत 21/28 — अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जिन्न सुनें, अल-जिन्न अनुवाद, अल-जिन्न mp3, अल-जिन्न pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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