अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِلَّا مَنِ ارْتَضَىٰ: सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने चुन लिया और पसंद कर लिया।
- مِن رَّسُولٍ: पैगंबरों में से।
- يَسْلُكُ: चलाता है, भेजता है, नियुक्त करता है।
- مِن بَيْنِ يَدَيْهِ: उसके सामने (आगे)।
- وَمِنْ خَلْفِهِ: और उसके पीछे।
- رَصَدًا: पहरेदार, रक्षक (फ़रिश्ते)।
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला इन आयात में अपने इल्म-ए-ग़ैब (छिपे हुए ज्ञान) की बात बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि वह ज़ात जो हर छुपी हुई चीज़ को जानती है, उसने अपने ग़ैब (छिपे हुए भेद) को किसी पर प्रकट नहीं किया, सिवाय उन पैगंबरों के जिन्हें उसने अपनी रिसालत (पैगंबरी) के लिए चुना और जिन पर वह राज़ी हुआ। ऐसे चुने हुए पैगंबरों को अल्लाह अपने ग़ैब के कुछ भेदों से अवगत कराता है, जितना वह चाहता है — यह उसकी विशेष कृपा और रहमत है।
जब अल्लाह किसी रसूल को ग़ैब की कोई बात बताता है, तो वह उसकी हिफ़ाज़त के लिए उसके आगे और पीछे फ़रिश्तों के पहरेदार तैनात कर देता है। ये फ़रिश्ते रसूल की रक्षा करते हैं ताकि शैतान और जिन्न उस वही (प्रकाशना) को चुराकर काहिनों (ज्योतिषियों) तक न पहुँचा सकें, और न ही उसमें कोई मिलावट कर सकें। यह अल्लाह की ओर से रसूलों की सुरक्षा का विशेष प्रबंध है।
इस आयत से यह भी स्पष्ट होता है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है — चाहे वह ज़ाहिर हो या बातिन (छिपी हुई)। उसने हर चीज़ को गिनकर रखा है, और उसके ज्ञान से कोई चीज़ बाहर नहीं है। रसूलों को जो कुछ बताया जाता है, वह अल्लाह के असीम ज्ञान का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है, जो उसने अपनी हिकमत (बुद्धि) से उन्हें दिया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की महानता और उसके इल्म की बेपनाह गहराई का एहसास कराती है। जिस अल्लाह ने अपने पैगंबरों की इस कदर हिफ़ाज़त की, वही अल्लाह आज भी अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है। जब हम कुरआन की तिलावत करते हैं, तो हमें यक़ीन होना चाहिए कि यह कलाम (वचन) हर तरह की मिलावट से महफ़ूज़ (सुरक्षित) है, क्योंकि अल्लाह ने खुद इसकी हिफ़ाज़त का ज़िम्मा लिया है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को विशेष सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के रसूलों पर ईमान लाएँ, उनकी सुन्नत (तरीके) पर चलें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। जो व्यक्ति इस यक़ीन के साथ जीता है, उसका दिल सुकून पाता है और वह अल्लाह की रहमत के साये में जीवन बिताता है।
📜 आयत 25-28 — अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 27
सूरा अल-जिन्न आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जिस पैग़म्बर को पसन्द फरमाए तो उसके आगे और…सूरा आयत 27/28 — अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जिन्न सुनें, अल-जिन्न अनुवाद, अल-जिन्न mp3, अल-जिन्न pdf. आयत 25–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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