अल-मुज्जम्मिल · 9/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
رَّبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا ۝٩
Rabbul mashriqi wal maghriibi laaa ilaaha illaa Huwa fattakhizhu wakeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ: पूर्व और पश्चिम का स्वामी।
  • لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ: उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
  • فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا: अतः उसे ही अपना कार्यसाधक (भरोसे का सहारा) बना लो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके माध्यम से पूरी उम्मत को एक बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा दे रहा है। अल्लाह फ़रमाता है कि वही पूर्व और पश्चिम का रब (स्वामी) है। यानी पूरी दुनिया, पूरा ब्रह्मांड, हर दिशा और हर कोना — सब कुछ उसी के अधिकार में है। जब वह पूर्व और पश्चिम का मालिक है, तो सारी कायनात का मालिक भी वही है। इसलिए उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, कोई मददगार नहीं, कोई सहारा नहीं।

फिर अल्लाह अपने नबी ﷺ को और हम सबको निर्देश देता है: "فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا" — यानी उसे ही अपना वकील (कार्यसाधक और भरोसे का सहारा) बना लो। यानी अपने सारे काम, अपनी सारी ज़रूरतें, अपनी सारी परेशानियाँ — सब कुछ उसी को सौंप दो। उसी पर भरोसा रखो, उसी से मदद माँगो, और उसी पर पूरा यक़ीन रखो।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस अल्लाह ने पूर्व और पश्चिम को बनाया, जिसने सूरज और चाँद को अपने नियम पर चलाया, जिसने दिन और रात का सिलसिला जारी रखा — क्या वह हमारी छोटी-बड़ी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता? बेशक कर सकता है। इसलिए हमें अपने दिल को उसी से जोड़ना चाहिए, उसी पर भरोसा करना चाहिए, और उसी से अपनी हर हाजत माँगनी चाहिए।

यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की सबसे प्यारी और सबसे गहरी शिक्षा देती है — कि जब सब कुछ उसी का है, तो हमें किसी और के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए, किसी और से डरना नहीं चाहिए, और किसी और से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। अल्लाह ही काफी है, अल्लाह ही सब कुछ है।

इस आयत में एक दिल को सुकून देने वाली बात यह है कि अल्लाह ने हमें खुद बताया है कि उसे अपना वकील बना लो। यानी वह खुद चाहता है कि हम उस पर भरोसा करें, उस पर टूट पड़ें, और अपनी हर बात उससे कहें। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें अपनी तरफ बुलाया है और कहा है — मुझे अपना सहारा बना लो, मैं तुम्हारी हर मुश्किल हल कर दूँगा।

तो जो बंदा इस आयत पर अमल करता है, वह अपने दिल से हर तरह का डर और चिंता निकाल देता है, और अल्लाह पर पूरा भरोसा करके सुकून की ज़िंदगी जीता है। यही सच्ची कामयाबी है — कि बंदा अल्लाह को अपना वकील बना ले, और उसके सिवा किसी से न डरे, न उम्मीद रखे।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-मुज्जम्मिल

7إِنَّ لَكَ فِي النَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا
दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं
8وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًا
तो तुम अपने परवरदिगार के नाम का ज़िक्र करो और सबसे टूट कर उसी के हो रहो
9رَّبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا
(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ
10وَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًا
और जो कुछ लोग बका करते हैं उस पर सब्र करो और उनसे बा उनवाने शाएस्ता अलग थलग रहो
11وَذَرْنِي وَالْمُكَذِّبِينَ أُولِي النَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا
और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो
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अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 9

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Tuesday, August 18, 2026

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