अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سِحْرٌ (जादू): वह चीज़ जो असर दिखाने के लिए धोखे और फरेब पर आधारित हो।
- يُؤْثَر (जो आगे बताया/रिवायत किया जाता है): यानी जो पहले के लोगों से नक़्ल किया जाता है, या जो किसी से सीखा और दोहराया गया हो।
तफ़सीर:
यह आयत उस व्यक्ति (वलीद बिन मुग़ीरा) के बारे में है जिसने पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ और क़ुरआन के ख़िलाफ़ झूठे इल्ज़ाम लगाने की योजना बनाई। उसने पहले सोच-विचार किया, अपने दिल में बुरे इरादे पाले, और फिर अल्लाह की रहमत से दूर होकर हलाकत का हक़दार बना। जब उसे समझ नहीं आया कि क़ुरआन के ख़िलाफ़ क्या कहूँ, तो उसने अपना चेहरा बदला, भौंहें चढ़ाईं और घिन से मुँह फेर लिया। आख़िरकार उसकी ज़ुबान से निकला: "यह (क़ुरआन) तो बस एक जादू है जो पहले के लोगों से नक़्ल किया जाता है।" उसने कहा कि मुहम्मद ﷺ ने यह किसी इंसान से सीखा है और इसे अल्लाह का कलाम बता रहे हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान के पास सच्चाई के ख़िलाफ़ कोई दलील नहीं होती, तो वह झूठ और बहानों का सहारा लेता है। लेकिन अल्लाह का कलाम इंसानी बातों से बिल्कुल अलग है — इसकी फ़साहत, बलाग़त, गहराई और असरदारी साबित करती है कि यह अल्लाह की तरफ़ से है। क़ुरआन वह किताब है जो दिलों को रोशनी देती है, ज़िंदगी को सही राह दिखाती है, और हर ज़माने के लिए हिदायत है। जो लोग इसे जादू कहते थे, आज भी वही लोग हैं जो सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, लेकिन जो दिल खोलकर इसकी तरफ़ आते हैं, वे कभी निराश नहीं होते। क़ुरआन की हर आयत इंसान को अल्लाह के करीब लाती है, और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है कि यह किसी इंसान का कलाम नहीं, बल्कि रब्बुल-आलमीन का फ़रमान है।
📜 आयत 22-26 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 24
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से)…सूरा आयत 24/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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