अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَقَر (सक़र): यह जहन्नम का एक नाम है, जो उसकी भयावहता और प्रचंड आग को दर्शाता है। कुछ विद्वानों ने कहा कि यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि यह शरीर को झुलसा देती है और त्वचा को जला देती है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में सवालिया अंदाज़ में फ़रमा रहे हैं: "और तुम्हें क्या मालूम कि सक़र क्या है?" यह एक ऐसा सवाल है जो सक़र (जहन्नम) की हैसियत और उसके अज़ाब की सख्ती को बयान करने के लिए है। यानी ऐ नबी! तुम्हें इसका पूरा इल्म नहीं हो सकता कि सक़र कितनी भयानक और दर्दनाक जगह है। यह अल्लाह का एक अंदाज़-ए-बयान है जो उसकी अज़मत और दहशत को ज़ाहिर करता है।
सक़र जहन्नम की एक ऐसी आग है जो हर चीज़ को अपनी लपटों में ले लेती है। वह न तो किसी गोश्त को बाक़ी छोड़ती है और न ही हड्डी को, बल्कि सब कुछ जला डालती है। यह त्वचा को बदल देती है, उसे काला कर देती है और झुलसा देती है। उसके अज़ाब की निगरानी के लिए उन्नीस सख्त मिज़ाज फ़रिश्ते मुक़र्रर हैं, जो अल्लाह के हुक्म से उसके रहने वालों पर अज़ाब नाज़िल करते हैं। यह फ़रिश्ते निहायत सख्त और बेरहम हैं, वे अल्लाह के हुक्म की पूरी तरह पालना करते हैं और किसी पर रहम नहीं करते।
यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब कुछ काफ़िरों ने मज़ाक़िया अंदाज़ में सक़र के बारे में पूछा था। अल्लाह ने इसका जवाब इस अंदाज़ में दिया कि यह कोई मज़ाक़ की चीज़ नहीं, बल्कि एक हक़ीक़त है जिसकी हैसियत और अज़ाब का अंदाज़ा लगाना इंसान की समझ से बाहर है। यह एक चेतावनी है कि इस आग से बचने की कोशिश करो, क्योंकि इसका अज़ाब बेहद सख्त और दर्दनाक है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी रहमत की तरफ़ रग़बत दिलाती है। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है ताकि हम उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। जो लोग उसकी नाफ़रमानी करते हैं, उनके लिए सक़र जैसी भयानक जगह तैयार है। लेकिन अल्लाह की रहमत भी बेहद वसीअ है — वह चाहता है कि हम तौबा करें और उसकी तरफ़ लौट आएं। यह आयत हमें दुनिया की ज़िंदगी की हक़ीक़त याद दिलाती है कि यह ज़िंदगी आख़िरत की तैयारी के लिए है। अगर हम अल्लाह के हुक्मों पर चलें और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत को अपनाएं, तो हम इस भयानक अज़ाब से बच सकते हैं और जन्नत की नेमतों के हक़दार बन सकते हैं। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और सक़र के अज़ाब से महफ़ूज़ रखे। आमीन।
📜 आयत 25-29 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 27
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या हैसूरा आयत 27/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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