अल-मुद्दस्सिर · 3/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ ۝٣
Wa rabbaka fakabbir
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَكَبِّرْ: अर्थात अल्लाह की बड़ाई करो, उसे महान और सर्वोच्च मानो, और उसे ही सबसे बड़ा समझो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि जब तुम उठे हो और लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराने का काम शुरू किया है, तो सबसे पहले अपने रब की बड़ाई करो। यानी उसे ही सबसे महान, सर्वोच्च और पूर्ण गुणों वाला मानो। उसे ही पूजा, आज्ञाकारिता और समर्पण का एकमात्र अधिकारी समझो। यह आदेश उन सभी झूठे देवताओं और मूर्तियों की बड़ाई को ख़त्म करने के लिए है, जिन्हें लोग अल्लाह के साथ जोड़ते थे। जब तुम अल्लाह की बड़ाई करते हो, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उसके सिवा कोई और बड़ाई का हक़दार नहीं है। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की नींव है, जिस पर पूरा इस्लाम खड़ा है। अल्लाह की बड़ाई का अर्थ केवल ज़बान से "अल्लाहु अकबर" कहना नहीं है, बल्कि दिल से उसे सबसे बड़ा मानना और अपने पूरे जीवन को उसी के अनुसार ढालना है। जब दिल में अल्लाह की महानता बैठ जाए, तो इंसान उसके सिवा किसी और के आगे झुकता नहीं, किसी और से डरता नहीं, और न ही किसी और से उम्मीद रखता है। यही वह शक्ति है जो मुसलमान को हर परिस्थिति में मज़बूत बनाती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन के हर क्षेत्र में अल्लाह की बड़ाई को सबसे ऊपर रखना चाहिए। जब हम किसी काम की शुरुआत करें, तो अल्लाह की बड़ाई से करें। यह हमें ग़ैर-अल्लाह के आगे झुकने से बचाता है और हमें आत्म-सम्मान और स्वाभिमान देता है। इस आयत में हमारे लिए यह संदेश है कि जो व्यक्ति अल्लाह को सबसे बड़ा मान लेता है, उसके लिए दुनिया की कोई ताक़त बड़ी नहीं रहती। वह हर मुश्किल का सामना अल्लाह के भरोसे पर करता है। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी और चैन की ज़िंदगी तक पहुँचाता है। आइए, हम अपने दिलों में अल्लाह की महानता को बिठाएँ और अपने हर अमल को उसी की रज़ा के लिए करें।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

1يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ
ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो
2قُمْ فَأَنذِرْ
और लोगों को (अज़ाब से) डराओ
3وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो
4وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ
और अपने कपड़े पाक रखो
5وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ
और गन्दगी से अलग रहो
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 3

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Tuesday, September 29, 2026

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