अल-मुद्दस्सिर · 42/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
مَا سَلَكَكُمْ فِي سَقَرَ ۝٤٢
Maa salakakum fee saqar
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا سَلَكَكُمْ: किस चीज़ ने तुम्हें दाखिल किया / कौन सी चीज़ तुम्हें ले गई।
  • سَقَرَ: जहन्नम का एक नाम, जो उसकी आग की सख्ती और भयंकरता को बयान करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का हिस्सा है जब जन्नत वाले (मोमिनीन) जहन्नम के मुजरिमों से पूछेंगे। यह पूछताछ सिर्फ़ जानकारी के लिए नहीं होगी, बल्कि उन्हें उनके कुकर्मों की याद दिलाने और उन पर अफसोस जताने के लिए होगी। वे कहेंगे: "किस चीज़ ने तुम्हें 'सक़र' (जहन्नम) में डाला?" यानी कौन सा वह अमल था, कौन सी वह गलती थी जिसके कारण तुम इस भयानक आग के शिकार हुए?

यह सवाल उन्हें जवाब देने पर मजबूर करेगा, और उनका जवाब क़ुरआन में आगे आता है कि वे कहेंगे: "हम नमाज़ नहीं पढ़ते थे, हम मिस्कीनों को खाना नहीं खिलाते थे, हम बातिल में डूबे रहते थे और हम रोज़े जज़ा (क़ियामत) को झुठलाते थे।"

इस आयत में एक बहुत बड़ी सीख है। यह हमें बताती है कि आज हम जिन आरामों और लज़्ज़तों में मगन हैं, वह सब कुछ यहीं नहीं रुक जाएगा। एक दिन हमें अपने किए का हिसाब देना होगा। यह सवाल सिर्फ़ जहन्नम वालों से नहीं होगा, बल्कि हर इंसान से उसके रब के सामने पूछा जाएगा कि तूने अपनी ज़िंदगी कैसे गुज़ारी? तूने मेरे हुक्मों का कितना पालन किया?

इसलिए ऐ बंदे! आज ही अपने आप को देख ले। क्या तेरी नमाज़ क़ायम है? क्या तू अल्लाह की राह में खर्च करता है? क्या तू सच्चाई पर है? यह मत सोच कि मौत बहुत दूर है। मौत तो हर लम्हा करीब है। जब मौत आ जाएगी, तो पछताने का वक़्त नहीं मिलेगा। आज का दिन नेकियों का सौदा करने का है, कल का दिन सिर्फ़ जज़ा (बदला) का दिन होगा।

अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो नमाज़ क़ायम करते हैं, जो दूसरों की मदद करते हैं, जो सच्चाई पर चलते हैं और जो आख़िरत के दिन पर पक्का ईमान रखते हैं। आमीन।



📜 आयत 40-44 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

40فِي جَنَّاتٍ يَتَسَاءَلُونَ
(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे
41عَنِ الْمُجْرِمِينَ
कि आख़िर तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी
42مَا سَلَكَكُمْ فِي سَقَرَ
वह लोग कहेंगे
43قَالُوا لَمْ نَكُ مِنَ الْمُصَلِّينَ
कि हम न तो नमाज़ पढ़ा करते थे
44وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ الْمِسْكِينَ
और न मोहताजों को खाना खिलाते थे
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
42आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 42

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Saturday, October 3, 2026

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