अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صُحُفًا (सुहुफ़न): किताबें, लिखित पत्र या पन्ने।
- مُنَشَّرَةً (मुनश्शरतन): खोले हुए, फैलाए हुए, जिन्हें पढ़ा जा सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन मक्की मुशरिकीन की हालत बयान कर रही है जो हक़ को क़बूल करने से इनकार करते थे। उन्होंने नबी करीम ﷺ से कहा था कि अगर आप चाहते हैं कि हम आपकी पैरवी करें, तो हममें से हर एक के सिरहाने अल्लाह की तरफ़ से एक खुला हुआ ख़त आ जाए, जिसमें लिखा हो कि मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं और हमें आपकी इत्तिबा करने का हुक्म दिया जाए।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग सच्चाई की तलाश में नहीं हैं, बल्कि हर शख्स सिर्फ ये चाहता है कि उसके पास एक खुला हुआ आसमानी ख़त आ जाए। ये उनकी ज़िद और सरकशी की इंतिहा है। अगर वाकई उन्हें हक़ की तलाश होती, तो उनके सामने जो मौजिज़े और दलीलें पेश की गईं, वो काफी थीं। लेकिन उनका मकसद हक़ को मानना नहीं, बल्कि बहाने बनाना और रसूल ﷺ की दावत को टालना था।
असल बात ये है कि ये लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, न क़यामत के दिन का खौफ़ उनके दिलों में है, और न ही वो हिसाब-किताब पर यक़ीन रखते हैं। अगर उन्हें यक़ीन होता कि एक दिन उन्हें अपने आमाल का हिसाब देना है, तो वो इस तरह की बेहूदा माँगें न करते और न ही हक़ से मुँह मोड़ते।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें हक़ को क़बूल करने में देर नहीं करनी चाहिए। अल्लाह ने कुरआन और सुन्नत की शक्ल में हिदायत का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। हमें चाहिए कि जो दलीलें और सबूत हमारे सामने हैं, उन पर अमल करें और बहानों की तलाश में न रहें। याद रखें, आख़िरत का दिन ज़रूर आने वाला है, और उस दिन हर इंसान से उसके आमाल का हिसाब लिया जाएगा। जो लोग आज हक़ को नहीं मानते, वो कल पछताएँगे, लेकिन पछतावे का वो वक़्त किसी काम न आएगा।
📜 आयत 50-54 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 52
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी…सूरा आयत 52/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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