अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَلَّا (कल्ला): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है। यह शब्द निषेध और झिड़की के लिए आता है।
- لَا يَخَافُونَ (ला यख़ाफ़ून): वे डरते नहीं हैं।
- الْآخِرَةَ (आख़िरत): परलोक, क़ियामत का दिन, जहाँ हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब होगा।
विस्तृत व्याख्या:
इन मशरिकों (बहुदेववादियों) का दावा था कि अगर अल्लाह उन पर कोई खुला चमत्कार या आसमानी किताब नाज़िल कर दे, तो वे ईमान ले आएँगे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यह उनका बहाना नहीं है, बल्कि उनके दिलों में एक गहरी बीमारी है। असल बात यह है कि वे आख़िरत से डरते ही नहीं हैं। यदि उन्हें यक़ीन होता कि एक दिन उन्हें मरने के बाद जीवित होकर अपने अमलों का हिसाब देना है, और उनके किए की सज़ा मिलेगी, तो वे इस तरह हठधर्मी और अकड़ न दिखाते।
उनके दिलों में आख़िरत का भय नहीं है, इसीलिए वे न तो नबी की बात मानते हैं, न निशानियों पर ग़ौर करते हैं, और न ही अपने किए पर शर्मिंदा होते हैं। अगर उन्हें अल्लाह के अज़ाब का ज़रा सा भी ख़ौफ़ होता, तो वे अपने झूठे दावों से बाज़ आ जाते और सच्चाई के आगे सर झुका देते।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की जड़ दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और आख़िरत का यक़ीन है। जिस दिल में यह डर होता है, वह हर गुनाह से बचता है, हर अच्छे काम की तरफ़ दौड़ता है। और जिस दिल से यह डर ख़त्म हो जाए, वह इंसान हर बुराई में गिर सकता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! आज हमें भी अपने दिलों में आख़िरत का ख़ौफ़ पैदा करना है। याद रखिए, यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से आँखें बंद कर लेते हैं, वे कल क़ियामत के दिन पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त निकल चुका होगा। अल्लाह हमें सच्चा ईमान और आख़िरत का ख़ौफ़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 51-55 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 53
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही…सूरा आयत 53/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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