अल-मुद्दस्सिर · 53/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ ۝٥٣
Kallaa bal laa yakhaafoonal aakhirah
📖 हिंदी अर्थ
ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَلَّا (कल्ला): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है। यह शब्द निषेध और झिड़की के लिए आता है।
  • لَا يَخَافُونَ (ला यख़ाफ़ून): वे डरते नहीं हैं।
  • الْآخِرَةَ (आख़िरत): परलोक, क़ियामत का दिन, जहाँ हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब होगा।

विस्तृत व्याख्या:

इन मशरिकों (बहुदेववादियों) का दावा था कि अगर अल्लाह उन पर कोई खुला चमत्कार या आसमानी किताब नाज़िल कर दे, तो वे ईमान ले आएँगे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यह उनका बहाना नहीं है, बल्कि उनके दिलों में एक गहरी बीमारी है। असल बात यह है कि वे आख़िरत से डरते ही नहीं हैं। यदि उन्हें यक़ीन होता कि एक दिन उन्हें मरने के बाद जीवित होकर अपने अमलों का हिसाब देना है, और उनके किए की सज़ा मिलेगी, तो वे इस तरह हठधर्मी और अकड़ न दिखाते।

उनके दिलों में आख़िरत का भय नहीं है, इसीलिए वे न तो नबी की बात मानते हैं, न निशानियों पर ग़ौर करते हैं, और न ही अपने किए पर शर्मिंदा होते हैं। अगर उन्हें अल्लाह के अज़ाब का ज़रा सा भी ख़ौफ़ होता, तो वे अपने झूठे दावों से बाज़ आ जाते और सच्चाई के आगे सर झुका देते।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की जड़ दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और आख़िरत का यक़ीन है। जिस दिल में यह डर होता है, वह हर गुनाह से बचता है, हर अच्छे काम की तरफ़ दौड़ता है। और जिस दिल से यह डर ख़त्म हो जाए, वह इंसान हर बुराई में गिर सकता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! आज हमें भी अपने दिलों में आख़िरत का ख़ौफ़ पैदा करना है। याद रखिए, यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से आँखें बंद कर लेते हैं, वे कल क़ियामत के दिन पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त निकल चुका होगा। अल्लाह हमें सच्चा ईमान और आख़िरत का ख़ौफ़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 51-55 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

51فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍ
कि येर से (दुम दबा कर) भागते हैं
52بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً
असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ
53كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ
ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते
54كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ
हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है
55فَمَن شَاءَ ذَكَرَهُ
तो जो चाहे उसे याद रखे
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 53

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही…

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Thursday, October 1, 2026

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