अल-मुद्दस्सिर · 56/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ ۝٥٦
Wa maa yazkuroona illaaa any yashaaa`al laah; Huwa ahlut taqwaa wa ahlul maghfirah
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَذْكُرُونَ (यज़्कुरून): वे नसीहत हासिल करें, सीखें, याद रखें।
  • أَهْلُ التَّقْوَىٰ (अह्लुत्तक़्वा): तक़्वा (परहेज़गारी) का सच्चा हक़दार, जिसकी इबादत की जाए और उसकी नाफ़रमानी से बचा जाए।
  • أَهْلُ الْمَغْفِرَةِ (अह्लुल-मग़्फ़िराह): क्षमा करने का सच्चा हक़दार, जो अपने बंदों के गुनाह माफ़ करने की पूरी शक्ति और कृपा रखता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत बताती है कि यह क़ुरआन एक ऐसी नसीहत और सीख है जो हर उस व्यक्ति के लिए काफ़ी है जो सीखना चाहता है। जो कोई भी सच्चे दिल से इससे सबक लेना चाहे, वह इसके द्वारा हिदायत पा सकता है और अपनी ज़िंदगी को सही राह पर ला सकता है। लेकिन यह भी सच है कि कोई व्यक्ति तब तक नसीहत हासिल नहीं कर सकता जब तक अल्लाह खुद उसे हिदायत की तौफ़ीक़ (सफलता) न दे। यानी हिदायत का मूल स्रोत अल्लाह की इच्छा और मेहरबानी है।

इसके बाद अल्लाह तआला अपनी दो खूबियाँ बयान करता है जो बंदों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी हैं। पहली यह कि वह अह्लुत्तक़्वा है, यानी वही सच्चा हक़दार है कि उससे डरा जाए, उसकी इबादत की जाए, उसके हुक्मों को माना जाए और उसकी मनाही से बचा जाए। किसी और से डरना और किसी और की इबादत करना बिल्कुल बेकार है, क्योंकि डर और इबादत का असली हक़दार सिर्फ़ वही है। दूसरी खूबी यह कि वह अह्लुल-मग़्फ़िराह है, यानी वही क्षमा करने का सच्चा हक़दार है। जब बंदा अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ लौटता है और उससे डरता हुआ उसकी इबादत करता है, तो अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है, चाहे वे कितने ही बड़े क्यों न हों।

यह आयत मोमिनों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी और उम्मीद का पैग़ाम है। अल्लाह ने हमें बताया है कि हिदायत उसके हाथ में है, इसलिए हमें चाहिए कि हम उससे हिदायत की दुआ करें और उसकी तरफ़ पूरी तरह रुजू करें। साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है। वह उन लोगों को माफ़ करने का हक़दार है जो उससे डरते हैं, उसकी इबादत करते हैं और अपनी गलतियों पर पछतावा करके उसकी ओर लौटते हैं। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 54-56 — अल-मुद्दस्सिर

54كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ
हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है
55فَمَن شَاءَ ذَكَرَهُ
तो जो चाहे उसे याद रखे
56وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ
और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है
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अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 56

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने…

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Tuesday, August 18, 2026

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