अल-क़ियामा · 30/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ ۝٣٠
Ilaa rabbika yawma`izinil masaaq
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • المَسَاق — ले जाया जाना, हाँककर ले जाने का स्थान या क्रिया। अर्थात् सबको एकत्रित करके उस ओर प्रस्थान कराया जाना।

तफ़सीर:

जब मृत्यु का समय आता है और रूह गले तक पहुँच जाती है, और हाज़िरीन में से कोई कहता है कि कोई झाड़-फूँक करने वाला है जो इस व्यक्ति को बचा ले, और मरने वाला स्वयं यक़ीन कर लेता है कि अब दुनिया से जुदाई का वक़्त आ गया है — उस वक़्त वह फ़रिश्तों को देखता है और उसे मालूम हो जाता है कि यही आख़िरत की शुरुआत है। उसी दिन सबको उनके रब की तरफ़ ले जाया जाएगा।

यानी क़यामत के दिन सारे इंसान — चाहे वे दुनिया में कितने भी बड़े, ताक़तवर या अमीर क्यों न रहे हों — सबको बेबसी की हालत में अपने रब की ओर हाँका जाएगा। कोई भी उस दिन अपनी मर्ज़ी से नहीं आएगा, बल्कि सबको मजबूरन उस हज़रत के सामने पेश किया जाएगा जो सबका मालिक है। वहाँ कोई सिफ़ारिशी, कोई वकील, कोई सहारा देने वाला नहीं होगा। हर शख्स अपने किए का हिसाब देगा।

यह मंज़िल दो ही रास्तों में से एक पर ख़त्म होगी — या तो जन्नत की तरफ़ ले जाया जाएगा या जहन्नम की तरफ़। यह वह दिन होगा जब हर आँख झुकी हुई होगी, हर दिल धड़कता हुआ होगा और हर इंसान सिर्फ़ अपने अमल का नतीजा देखेगा।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इस दुनिया की ज़िन्दगी आख़िरी मंज़िल नहीं है। हमें हर वक़्त याद रखना चाहिए कि एक दिन हमें अपने रब के सामने खड़ा होना है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इताअत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए उस दिन राहत और खुशी होगी। और जो लोग अल्लाह से ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए वह दिन बड़ी मुश्किलों का दिन होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ़ रुजू कर लें, उसकी रहमत और मग़फिरत के तलबगार बन जाएँ, ताकि उस दिन हमारा मसाक़ जन्नत की तरफ़ हो, न कि जहन्नम की तरफ़। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 28-32 — सूरा अल-क़ियामा

28وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
29وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
30إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है
31فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ
तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी
32وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा
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40आयत
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30आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 30

सूरा अल-क़ियामा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

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Tuesday, September 29, 2026

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