अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- المَسَاق — ले जाया जाना, हाँककर ले जाने का स्थान या क्रिया। अर्थात् सबको एकत्रित करके उस ओर प्रस्थान कराया जाना।
तफ़सीर:
जब मृत्यु का समय आता है और रूह गले तक पहुँच जाती है, और हाज़िरीन में से कोई कहता है कि कोई झाड़-फूँक करने वाला है जो इस व्यक्ति को बचा ले, और मरने वाला स्वयं यक़ीन कर लेता है कि अब दुनिया से जुदाई का वक़्त आ गया है — उस वक़्त वह फ़रिश्तों को देखता है और उसे मालूम हो जाता है कि यही आख़िरत की शुरुआत है। उसी दिन सबको उनके रब की तरफ़ ले जाया जाएगा।
यानी क़यामत के दिन सारे इंसान — चाहे वे दुनिया में कितने भी बड़े, ताक़तवर या अमीर क्यों न रहे हों — सबको बेबसी की हालत में अपने रब की ओर हाँका जाएगा। कोई भी उस दिन अपनी मर्ज़ी से नहीं आएगा, बल्कि सबको मजबूरन उस हज़रत के सामने पेश किया जाएगा जो सबका मालिक है। वहाँ कोई सिफ़ारिशी, कोई वकील, कोई सहारा देने वाला नहीं होगा। हर शख्स अपने किए का हिसाब देगा।
यह मंज़िल दो ही रास्तों में से एक पर ख़त्म होगी — या तो जन्नत की तरफ़ ले जाया जाएगा या जहन्नम की तरफ़। यह वह दिन होगा जब हर आँख झुकी हुई होगी, हर दिल धड़कता हुआ होगा और हर इंसान सिर्फ़ अपने अमल का नतीजा देखेगा।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इस दुनिया की ज़िन्दगी आख़िरी मंज़िल नहीं है। हमें हर वक़्त याद रखना चाहिए कि एक दिन हमें अपने रब के सामने खड़ा होना है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इताअत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए उस दिन राहत और खुशी होगी। और जो लोग अल्लाह से ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए वह दिन बड़ी मुश्किलों का दिन होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ़ रुजू कर लें, उसकी रहमत और मग़फिरत के तलबगार बन जाएँ, ताकि उस दिन हमारा मसाक़ जन्नत की तरफ़ हो, न कि जहन्नम की तरफ़। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 28-32 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 30
सूरा अल-क़ियामा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना हैसूरा आयत 30/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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