अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَدَّقَ: सत्य माना, ईमान लाया, पुष्टि की।
- صَلَّىٰ: नमाज़ अदा की, अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ी।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उस काफ़िर इंसान की मज़म्मत (निंदा) कर रहा है जो हक़ से मुँह मोड़ता है। फ़रमाता है कि उसने न तो रसूल ﷺ पर ईमान लाया, न क़ुरआन को सच माना, और न ही अल्लाह की इबादत के लिए नमाज़ अदा की। उसने न तो अपने दिल से तस्दीक़ की और न अपने बदन से अल्लाह के सामने झुका। यानी उसका दिल हक़ से ख़ाली था और उसके अमल भी इबादत से ख़ाली थे। वह न तो सच्चाई को क़बूल करने वाला था और न ही अल्लाह की बंदगी करने वाला। यह उसकी सख़्त महरूमी और बदबख़्ती की निशानी है कि उसने दुनिया और आख़िरत की भलाई के दोनों ज़रिए ठुकरा दिए — ईमान भी नहीं लाया और नेक अमल भी नहीं किए।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें सिखाती है कि नजात (मुक्ति) का रास्ता सिर्फ़ दो चीज़ों में है: सच्चा ईमान और सच्चा अमल। जिसने इन दोनों को छोड़ दिया, उसने अपनी कामयाबी का सारा सामान खो दिया। अल्लाह तआला ने हमें नमाज़ जैसी पाक इबादत दी है जो ईमान की निशानी और जन्नत की कुंजी है। जो शख्स नमाज़ पढ़ता है और दिल से अल्लाह को मानता है, वह कभी बर्बाद नहीं हो सकता। आओ हम अपनी ज़िंदगी को ईमान और नमाज़ से रौशन करें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। याद रखें, जो शख्स दुनिया में अल्लाह के सामने सजदा करता है, अल्लाह उसे क़ियामत के दिन अपने सामने खड़ा करके सरफ़राज़ी अता करेगा।
📜 आयत 29-33 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 31
सूरा अल-क़ियामा आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की…सूरा आयत 31/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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