अल-क़ियामा · 29/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ ۝٢٩
Waltaffatis saaqu bissaaq
📖 हिंदी अर्थ
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالْتَفَّتِ: लिपट गई, एक दूसरे से जुड़ गई।
  • السَّاقُ بِالسَّاقِ: पिंडली के साथ पिंडली (एक पैर की पिंडली दूसरे पैर की पिंडली से)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब इंसान की मौत का समय आता है और वह सख्त नज़आ (मौत की पीड़ा) में होता है, तो उसकी दोनों पिंडलियाँ एक-दूसरे से लिपट जाती हैं और वह अपने पैरों को हिलाने की ताकत भी खो देता है। यह वह क्षण होता है जब दुनिया की आख़िरी सख्ती और आख़िरत की पहली सख्ती एक साथ मिल जाती हैं। एक तरफ़ मौत की तकलीफ़, दूसरी तरफ़ आगे का अंजाम — दोनों मुसीबतें एक साथ इंसान पर टूट पड़ती हैं। यही वह वक़्त है जब इंसान को पूरा यक़ीन हो जाता है कि अब दुनिया से जुदाई तय है और उसे अपने रब के सामने पेश होना है।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि मौत की घड़ी कितनी सख्त और भयावह होती है। जब इंसान की रूह गले तक पहुँच जाती है और हाज़िरीन कहते हैं, "कोई है जो इसे ठीक कर दे?" — उस वक़्त न कोई दवा काम आती है, न दुनिया का कोई सहारा। आदमी अकेला होता है, बेबस होता है, और उसे सिर्फ़ अपने अमल का सामना करना होता है।

इसलिए ऐ इंसान! इस घड़ी से पहले जाग जा। अपनी ज़िंदगी को संवार ले, अपने रब की इबादत कर, नेक काम कर और उस दिन की तैयारी कर जब तू अपने अकेले रब के सामने खड़ा होगा। यह आयत हमें बताती है कि अगर हम दुनिया में अल्लाह की राह पर चलें, उसके हुक्मों को मानें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर अमल करें, तो उस सख्त घड़ी में भी अल्लाह की रहमत हमारे साथ होगी। जो लोग दुनिया में अल्लाह से डरते हैं और नेकी करते हैं, उनके लिए उस दिन राहत और खुशी है। अल्लाह तआला हम सबको उस सख्त घड़ी में आसानी और अपनी रहमत नसीब फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-क़ियामा

27وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
28وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
29وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
30إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है
31فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ
तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी
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अनुवाद — अल-क़ियामा 29

सूरा अल-क़ियामा आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी

सूरा आयत 29/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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