अल-क़ियामा · 8/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
وَخَسَفَ الْقَمَرُ ۝٨
We khasafal qamar
📖 हिंदी अर्थ
और चाँद गहन में लग जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَسَفَ (ख़सफ़ा): अंधकारमय हो जाना, प्रकाश चला जाना, या ग्रहण लग जाना।
  • الْقَمَر (अल-क़मर): चंद्रमा।

विस्तृत तफ़सीर:

जब क़ियामत का दिन आएगा, तो वहाँ के हालात इतने भयानक और हैरतअंगेज़ होंगे कि इंसान की आँखें खुली की खुली रह जाएँगी, वह स्तब्ध रह जाएगा और डर के मारे उसकी निगाहें चकरा जाएँगी। उस दिन चंद्रमा का प्रकाश जाता रहेगा, वह अंधकारमय हो जाएगा और उसकी रोशनी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। यहाँ तक कि सूर्य और चंद्रमा दोनों को एक साथ इकट्ठा किया जाएगा, लेकिन दोनों में से किसी में भी प्रकाश नहीं होगा। दोनों अंधकार में डूब जाएँगे। यह उस महान दिन की भयावहता का एक नमूना है, जब सारा निज़ाम-ए-कायनात बिखर जाएगा और हर चीज़ अपनी हालत खो देगी।

यह वह समय होगा जब इंसान घबराकर चीख़ उठेगा: "आज भागने की जगह कहाँ है?" लेकिन उस दिन कोई पनाहगाह नहीं होगी, कोई छिपने की जगह नहीं होगी। यह अल्लाह तआला की क़ुदरत का एक अज़ीम मंज़र है, जो हमें बताता है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी, और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम उस दिन के लिए तैयारी करें। जिस दिन चाँद की रोशनी भी ज़ालिम अंधकार में बदल जाएगी, उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी पनाह ही काम आएगी। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारना चाहिए, नेक अमल करने चाहिए, और उस दिन के ख़ौफ़ को अपने दिलों में जगह देनी चाहिए ताकि हम उस अज़ीम दिन की मुसीबतों से महफ़ूज़ रह सकें। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को उस दिन की हर परेशानी से बचाएगा और उन्हें जन्नत की नेमतों से नवाज़ेगा।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-क़ियामा

6يَسْأَلُ أَيَّانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ
पूछता है कि क़यामत का दिन कब होगा
7فَإِذَا بَرِقَ الْبَصَرُ
तो जब ऑंखे चकाचौन्ध में आ जाएँगी
8وَخَسَفَ الْقَمَرُ
और चाँद गहन में लग जाएगा
9وَجُمِعَ الشَّمْسُ وَالْقَمَرُ
और सूरज और चाँद इकट्ठा कर दिए जाएँगे
10يَقُولُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ الْمَفَرُّ
तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ
अल-क़ियामाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 8

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Monday, September 28, 2026

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