अल-इंसान · 11/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا ۝١١
Fa waqaahumul laahu sharra zaalikal yawmi wa laqqaahum nadratanw wa surooraa
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَوَقَاهُمُ (फ़वक़ाहुम): अल्लाह ने उन्हें बचा लिया।
  • شَرَّ (शर्र): बुराई, तकलीफ़, कठिनाई।
  • نَضْرَةً (नज़रतन): चेहरे की ताज़गी, चमक, नूरानियत।
  • سُرُورًا (सुरूरन): दिल की खुशी, प्रसन्नता।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक बंदों के बारे में है जो अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, उसकी इबादत करते हैं और उसके दीन पर क़ायम रहते हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें उस दिन की सख़्तियों और भयावह घटनाओं से महफ़ूज़ रखा, जिस दिन हर शख्स सिर्फ अपनी फ़िक्र में डूबा होगा। यह अल्लाह की ख़ास रहमत है कि वह अपने नेक बंदों को क़यामत के उस खौफ़नाक दिन की हर बुराई से बचा लेता है।

इसके साथ ही अल्लाह ने उन्हें दो चीज़ें अता कीं: एक नज़रत यानी चेहरे की रौनक़ और नूरानियत, जो उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई देगी, और दूसरी सुरूर यानी दिल की खुशी और इत्मीनान। यानी उनके चेहरे खुशी से दमकते होंगे और उनके दिल शांति और सुकून से भरे होंगे। यह उस सब्र का इनाम है जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पालना में किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, अगर हम अल्लाह पर भरोसा रखें और सब्र करें, तो अल्लाह हमें उस दिन की हर तकलीफ़ से बचाएगा और हमें ऐसी खुशी और नूरानियत देगा जिसका कोई अंदाज़ा नहीं। यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता।

दावती पहलू:

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अल्लाह अपने उन बंदों को, जो उसकी राह में सब्र करते हैं, क़यामत के दिन की हर बुराई से बचाने का वादा करता है। यह हमें बताती है कि दुनिया की परेशानियाँ और मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अल्लाह की रहमत उन सबसे बड़ी है। अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर अमल करें और मुश्किलों में सब्र करें, तो अल्लाह हमें ऐसी खुशी और राहत देगा जो इस दुनिया की किसी भी खुशी से बढ़कर होगी। यही सब्र और ईमान ही वह ज़रिया है जो हमें उस दिन की घबराहट से बचाकर जन्नत की नेमतों तक पहुँचाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अल-इंसान

9إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا
(और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा के लिए खिलाते हैं हम न तुम से बदले के ख़ास्तगार हैं और न शुक्र गुज़ारी के
10إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا
हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी
11فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
12وَجَزَاهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا
और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा
13مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا
वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीRevelation
11आयत

अनुवाद — अल-इंसान 11

सूरा अल-इंसान आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा…

सूरा आयत 11/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए