अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَوَقَاهُمُ (फ़वक़ाहुम): अल्लाह ने उन्हें बचा लिया।
- شَرَّ (शर्र): बुराई, तकलीफ़, कठिनाई।
- نَضْرَةً (नज़रतन): चेहरे की ताज़गी, चमक, नूरानियत।
- سُرُورًا (सुरूरन): दिल की खुशी, प्रसन्नता।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन नेक बंदों के बारे में है जो अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, उसकी इबादत करते हैं और उसके दीन पर क़ायम रहते हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें उस दिन की सख़्तियों और भयावह घटनाओं से महफ़ूज़ रखा, जिस दिन हर शख्स सिर्फ अपनी फ़िक्र में डूबा होगा। यह अल्लाह की ख़ास रहमत है कि वह अपने नेक बंदों को क़यामत के उस खौफ़नाक दिन की हर बुराई से बचा लेता है।
इसके साथ ही अल्लाह ने उन्हें दो चीज़ें अता कीं: एक नज़रत यानी चेहरे की रौनक़ और नूरानियत, जो उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई देगी, और दूसरी सुरूर यानी दिल की खुशी और इत्मीनान। यानी उनके चेहरे खुशी से दमकते होंगे और उनके दिल शांति और सुकून से भरे होंगे। यह उस सब्र का इनाम है जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पालना में किया।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, अगर हम अल्लाह पर भरोसा रखें और सब्र करें, तो अल्लाह हमें उस दिन की हर तकलीफ़ से बचाएगा और हमें ऐसी खुशी और नूरानियत देगा जिसका कोई अंदाज़ा नहीं। यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता।
दावती पहलू:
यह आयत हर मुसलमान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अल्लाह अपने उन बंदों को, जो उसकी राह में सब्र करते हैं, क़यामत के दिन की हर बुराई से बचाने का वादा करता है। यह हमें बताती है कि दुनिया की परेशानियाँ और मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अल्लाह की रहमत उन सबसे बड़ी है। अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर अमल करें और मुश्किलों में सब्र करें, तो अल्लाह हमें ऐसी खुशी और राहत देगा जो इस दुनिया की किसी भी खुशी से बढ़कर होगी। यही सब्र और ईमान ही वह ज़रिया है जो हमें उस दिन की घबराहट से बचाकर जन्नत की नेमतों तक पहुँचाएगा।
📜 आयत 9-13 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 11
सूरा अल-इंसान आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा…सूरा आयत 11/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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