अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अबूसन (عبوسًا): ऐसा दिन जिसमें चेहरे टेढ़े-मेढ़े और भयावह हों, भौंहें तनी हुई हों।
- क़म्तरीर (قمطرير): अत्यंत कठोर, भयानक और संकट से भरा हुआ दिन।
तफ़सीर:
यह आयत उन नेक लोगों का वर्णन करती है जो अल्लाह की इबादत में अपना जीवन बिताते हैं और उसके भय से काँपते रहते हैं। वे कहते हैं: "हम अपने रब से उस दिन का भय रखते हैं जो अत्यंत कठोर, भयानक और संकटों से भरा होगा।"
यह वे लोग हैं जो दुनिया में अल्लाह के आदेशों का पालन करते थे, अपने वादों को पूरा करते थे, और दूसरों की मदद करते थे—चाहे वह गरीब हो, अनाथ हो या कैदी। वे अपने अच्छे कर्मों का बदला नहीं चाहते थे, न ही लोगों से प्रशंसा की आशा रखते थे। उनका एकमात्र उद्देश्य अल्लाह की रज़ा और उसका प्रतिफल था।
वे उस दिन से डरते हैं जब चेहरे भय से विकृत हो जाएँगे, आँखें खौफ से फटी रह जाएँगी, और हर इंसान केवल अपनी ही फिक्र में डूबा होगा। यह भय उन्हें निराशा नहीं देता, बल्कि उन्हें अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है। वे जानते हैं कि अल्लाह का दिन अत्यंत कठिन है, इसलिए वे उसकी रहमत की उम्मीद में अपने आपको अच्छे कर्मों से सजाते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का भय मोमिन की पहचान है। यह भय उसे गुनाहों से रोकता है और नेकियों की ओर ले जाता है। जो व्यक्ति अल्लाह के उस भयानक दिन से डरता है, वह दुनिया में अपने आचरण को सुधारता है, लोगों के साथ भलाई करता है, और अपने रब की इबादत में लगा रहता है।
ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत के झरने, सुंदर आवास और अनंत नेमतें तैयार की हैं। वे उस दिन सुरक्षित होंगे जब हर कोई भयभीत होगा। अल्लाह उन्हें उस दिन की परेशानियों से बचाएगा और उन्हें खुशी और शांति प्रदान करेगा।
इसलिए, हमें भी इन नेक लोगों की तरह अल्लाह से डरना चाहिए, उसकी इबादत करनी चाहिए, और दूसरों की मदद करनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें उस कठिन दिन में सुरक्षा और सफलता तक पहुँचाएगा। अल्लाह हमें अपने भय और अपनी रहमत के बीच संतुलन बनाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 8-12 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 10
सूरा अल-इंसान आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है…सूरा आयत 10/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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