अल-इंसान · 12/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
وَجَزَاهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا ۝١٢
Wa jazaahum bimaa sabaroo janatanw wa hareeraa
📖 हिंदी अर्थ
और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • जज़ाहुम (उन्हें बदला दिया) — अल्लाह ने उन्हें प्रतिफल दिया।
  • बिमा सबरू (इसलिए कि उन्होंने सब्र किया) — धैर्य और स्थिरता दिखाने के कारण।
  • जन्नतन (जन्नत / बाग़) — स्वर्ग का उद्यान।
  • व हरीरन (और रेशम) — नरम और कीमती रेशमी वस्त्र।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों से वादा किया है कि जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया — यानी अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करते हुए, उसकी मनाही से बचते हुए, और उसके फैसलों पर राज़ी रहते हुए धैर्य दिखाया — उन्हें अल्लाह उस सब्र का बदला देगा। यह बदला क्या है? यह जन्नत है, जो हर उस चीज़ से भरी हुई है जो इंसान के दिल को सुकून दे, और रेशम है, जो उनके पहनावे के लिए होगा।

यहाँ सब्र का ज़िक्र इसलिए किया गया कि जन्नत का रास्ता आसान नहीं होता — दुनिया में इंसान को परेशानियाँ, मुश्किलें और इम्तिहान आते हैं, लेकिन जो लोग इन सब पर सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी जगह देता है जहाँ कोई दुख, कोई थकान, कोई गर्मी और कोई सर्दी नहीं होगी। वे जन्नत के बाग़ों में आराम से बैठेंगे, जो कुछ चाहेंगे खाएँगे, और रेशम के नरम वस्त्र पहनेंगे — यह उनके सब्र का सबसे बड़ा इनाम है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की मुश्किलें और इम्तिहान अस्थायी हैं। जो इंसान अल्लाह के वादे पर भरोसा करता है और सब्र करता है, उसका अंजाम बेहद खूबसूरत है। अल्लाह कभी किसी का सब्र बेकार नहीं जाने देता — वह हर छोटी से छोटी तकलीफ़ का बदला जन्नत में देगा। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब बहुत दयालु है, वह हमारी मेहनत और सब्र को देखता है, और उसका इनाम उससे कहीं बेहतर है जो हम सोच सकते हैं। आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह पर सब्र करें — नमाज़ पर सब्र, हक़ बोलने पर सब्र, और बुराई से बचने पर सब्र — ताकि हम भी उसी जन्नत और रेशम के हक़दार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अल-इंसान

10إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا
हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी
11فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
12وَجَزَاهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا
और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा
13مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا
वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी
14وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَالُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا
और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे और मेवों के गुच्छे उनके बहुत क़रीब हर तरह उनके एख्तेयार में
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीRevelation
12आयत

अनुवाद — अल-इंसान 12

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Tuesday, August 18, 2026

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