अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जज़ाहुम (उन्हें बदला दिया) — अल्लाह ने उन्हें प्रतिफल दिया।
- बिमा सबरू (इसलिए कि उन्होंने सब्र किया) — धैर्य और स्थिरता दिखाने के कारण।
- जन्नतन (जन्नत / बाग़) — स्वर्ग का उद्यान।
- व हरीरन (और रेशम) — नरम और कीमती रेशमी वस्त्र।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों से वादा किया है कि जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया — यानी अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करते हुए, उसकी मनाही से बचते हुए, और उसके फैसलों पर राज़ी रहते हुए धैर्य दिखाया — उन्हें अल्लाह उस सब्र का बदला देगा। यह बदला क्या है? यह जन्नत है, जो हर उस चीज़ से भरी हुई है जो इंसान के दिल को सुकून दे, और रेशम है, जो उनके पहनावे के लिए होगा।
यहाँ सब्र का ज़िक्र इसलिए किया गया कि जन्नत का रास्ता आसान नहीं होता — दुनिया में इंसान को परेशानियाँ, मुश्किलें और इम्तिहान आते हैं, लेकिन जो लोग इन सब पर सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी जगह देता है जहाँ कोई दुख, कोई थकान, कोई गर्मी और कोई सर्दी नहीं होगी। वे जन्नत के बाग़ों में आराम से बैठेंगे, जो कुछ चाहेंगे खाएँगे, और रेशम के नरम वस्त्र पहनेंगे — यह उनके सब्र का सबसे बड़ा इनाम है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की मुश्किलें और इम्तिहान अस्थायी हैं। जो इंसान अल्लाह के वादे पर भरोसा करता है और सब्र करता है, उसका अंजाम बेहद खूबसूरत है। अल्लाह कभी किसी का सब्र बेकार नहीं जाने देता — वह हर छोटी से छोटी तकलीफ़ का बदला जन्नत में देगा। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब बहुत दयालु है, वह हमारी मेहनत और सब्र को देखता है, और उसका इनाम उससे कहीं बेहतर है जो हम सोच सकते हैं। आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह पर सब्र करें — नमाज़ पर सब्र, हक़ बोलने पर सब्र, और बुराई से बचने पर सब्र — ताकि हम भी उसी जन्नत और रेशम के हक़दार बनें।
📜 आयत 10-14 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 12
सूरा अल-इंसान आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम…सूरा आयत 12/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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