अल-इंसान · 13/31
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इंसान
مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا ۝١٣
muttaki`eena feeha `alal araaa `iki laa yarawna feehaa shamsanw wa laa zamhareeraa
📖 हिंदी अर्थ
वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُتَّكِئِينَ: तकिया लगाए हुए, आराम से बैठे हुए।
  • الْأَرَائِكِ: सिंहासन या ऊँची शय्याएँ जो सुंदर कपड़ों और पर्दों से सजी हों।
  • زَمْهَرِيرًا: अत्यधिक ठंड, कड़ाके की सर्दी।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों के उस सुखदायी प्रतिफल का वर्णन कर रही है जो अल्लाह की राह में सब्र करते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें जन्नत की उन ऊँची और सजी-सजाई शय्याओं (अराइक) पर तकिया लगाकर आराम करने का सम्मान दिया है, जहाँ वे पूर्ण सुख और शांति का अनुभव करेंगे।

इस जन्नत में उन्हें न तो सूरज की तपती धूप का सामना करना पड़ेगा जो उन्हें तकलीफ़ दे, और न ही कड़ाके की ठंड (ज़म्हरीर) जो उन्हें परेशान करे। यानी वहाँ का वातावरण हमेशा मध्यम और आदर्श होगा—न अधिक गर्मी, न अधिक सर्दी। यह उस दिन की भयावह गर्मी और कठोरता के बिल्कुल विपरीत है, जब सभी लोग अपने कर्मों के हिसाब से परेशान होंगे, लेकिन ये नेक लोग अल्लाह की रहमत से उस सब से सुरक्षित रहेंगे।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की मुश्किलें और कष्ट अस्थायी हैं। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा रखता है और सब्र के साथ नेक कर्म करता है, उसके लिए अल्लाह ने ऐसा स्थायी सुख तैयार किया है जिसकी कोई कमी नहीं। यहाँ की गर्मी और सर्दी, दर्द और परेशानी—सब कुछ उस आरामगाह की नेमतों के सामने फीका है।

आओ, हम इस आयत से सबक लें कि हम अपने जीवन में सब्र और शुक्र को अपनाएँ। अल्लाह ने जो भी हालात दिए हैं, उनमें उसकी रज़ा पर संतोष करें। याद रखें, जन्नत की यह शांति और आराम उन्हीं को मिलेगा जो दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसके दीन की खातिर मुश्किलें सहन करते हैं। यह वादा सच्चा है, और अल्लाह अपने वादे को पूरा करने वाला है। क्या ही अच्छा हो कि हम अपनी ज़िंदगी को इसी लक्ष्य के लिए समर्पित कर दें—ताकि उस दिन हम भी उन्हीं खुशनसीबों में शामिल हों, जो हर तरह की तकलीफ़ से मुक्त होकर हमेशा के लिए अल्लाह की रहमत में आराम करेंगे।



📜 आयत 11-15 — सूरा अल-इंसान

11فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
12وَجَزَاهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا
और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा
13مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا
वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी
14وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَالُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا
और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे और मेवों के गुच्छे उनके बहुत क़रीब हर तरह उनके एख्तेयार में
15وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِآنِيَةٍ مِّن فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا
और उनके सामने चाँदी के साग़र और शीशे के निहायत शफ्फ़ाफ़ गिलास का दौर चल रहा होगा
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अल-इंसान 13

सूरा अल-इंसान आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ…

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Thursday, October 1, 2026

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