अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- دَانِيَةً: निकट, पास आई हुई
- ظِلَالُهَا: उन (जन्नत के पेड़ों) की छायाएँ
- ذُلِّلَتْ: वश में कर दी गईं, आसान कर दी गईं
- قُطُوفُهَا: उनके फल (तोड़े जाने वाले गुच्छे)
- تَذْلِيلًا: पूरी तरह आसान करना, अत्यंत सुगम बनाना
तफसीर:
यह आयत उन मोमिनों के लिए जन्नत की उस नेमत का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने उनके सब्र और ईमान के बदले में तैयार की है। जन्नत के पेड़ों की छायाएँ उनके सिरों पर झुकी हुई होंगी, इतनी निकट कि जैसे वे उन्हें अपनी आगोश में लिए हुए हैं। कोई दूरी नहीं, कोई रुकावट नहीं — बस रहमत का साया उन पर छाया रहेगा।
और फिर उन पेड़ों के फल — अल्लाह ने उन्हें इस तरह वश में कर दिया होगा कि जन्नती जब चाहे, जिस तरह चाहे, खड़े हों या बैठे हों या लेटे हों — फल खुद उनकी पहुँच में झुक आएँगे। कोई मेहनत नहीं, कोई काँटा नहीं, कोई रुकावट नहीं। बस हाथ बढ़ाइए और मीठे-मीठे फल हथेली पर होंगे। यह है अल्लाह की उस मेहमाननवाज़ी का अंदाज़ — जो उसने अपने नेक बंदों के लिए रखी है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की मुश्किलें, तकलीफें और सब्र का लम्हा — यह सब कुछ देर का है। जो लोग आज अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाते हैं, अपनी आँखों को हराम से बचाते हैं, अपने दिल को किना और हसद से पाक रखते हैं — उनके लिए यही जन्नत है, जहाँ हर चीज़ उनके लिए आसान कर दी गई है।
और याद रखिए, यह सिर्फ़ एक नेमत का ज़िक्र है। असल जन्नत तो उससे कहीं बढ़कर है — जिसका कोई आँख ने देखा नहीं, कान ने सुना नहीं, और किसी इंसान के दिल ने उसका ख़याल भी नहीं किया। तो आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि उस दिन हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हों जिनके लिए यह आसानी और राहत तैयार की गई है। अल्लाह हमें अपनी रहमत से जन्नत का हक़ीक़ी मेहमान बनाए। आमीन।
📜 आयत 12-16 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 14
सूरा अल-इंसान आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे…सूरा आयत 14/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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