अल-इंसान · 16/31
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इंसान
قَوَارِيرَ مِن فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا ۝١٦
Qawaareera min fiddatin qaddaroohaa taqdeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और शीशे भी (काँच के नहीं) चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े के मुताबिक बनाए गए हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَوَارِيرَ: शीशे के बर्तन, कांच के प्याले।
  • مِن فِضَّةٍ: चांदी के बने हुए।
  • قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا: उन्होंने (साकियों/सेवकों ने) उन्हें उचित मात्रा में नाप-तौल कर भरा, जो न कम हो और न ज़्यादा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक और पुण्यात्मा लोगों के लिए जन्नत की उन नेअमतों (इनामों) का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने उनके लिए तैयार की हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि जन्नत में ख़िदमत करने वाले ग़िल्मान (सेवक) उनके पास चांदी के बने हुए शीशे के बर्तन लेकर आएंगे। ये बर्तन अपनी सफ़ाई, चमक और पारदर्शिता में शीशे जैसे होंगे, लेकिन असल में वे चांदी के होंगे। यानी उनमें शीशे की शफ़्फ़ाफ़ियत (पारदर्शिता) और चांदी की सफ़ेदी और चमक दोनों खूबियाँ होंगी।

सबसे खूबसूरत बात यह है कि उन बर्तनों को इस तरह भरा जाएगा कि हर पीने वाले को उसकी प्यास के हिसाब से बिल्कुल सही मात्रा में पेय दिया जाएगा—न कम, न ज़्यादा। यह अल्लाह की उस बेहतरीन मेहमाननवाज़ी की निशानी है कि वहाँ हर चीज़ इंसान की ख्वाहिश और ज़रूरत के मुताबिक़ मुकम्मल तौर पर मुहैया होगी। यह उस दरिया-ए-करम का नमूना है जहाँ हर लम्हा इंसान को नई ख़ुशी और इत्मीनान मिलेगा।

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेअमतें सिर्फ़ खाने-पीने तक सीमित नहीं, बल्कि वहाँ का हर ज़रिया, हर बर्तन और हर इंतज़ाम इतना बेहतरीन होगा कि इंसान का दिल हर पल शुक्र और ख़ुशी से भरा रहेगा। यह अल्लाह का वादा है उन लोगों के लिए जो दुनिया में उसकी इबादत करते हैं, उसके हुक्मों का पालन करते हैं और नेकियों में जुटे रहते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखिए, जन्नत की ये नेअमतें उस मेहनत का फल हैं जो हम दुनिया में अल्लाह की राह में करते हैं। जो लोग अल्लाह के लिए भूखे रहते हैं, मिस्कीनों और यतीमों को खाना खिलाते हैं, और अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, उनके लिए ही ये इनाम हैं। आइए हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं, ताकि हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हों जिनके लिए यह क़ुरआनी वादा है। अल्लाह हमें जन्नत की राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-इंसान

14وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَالُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا
और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे और मेवों के गुच्छे उनके बहुत क़रीब हर तरह उनके एख्तेयार में
15وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِآنِيَةٍ مِّن فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا
और उनके सामने चाँदी के साग़र और शीशे के निहायत शफ्फ़ाफ़ गिलास का दौर चल रहा होगा
16قَوَارِيرَ مِن فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا
और शीशे भी (काँच के नहीं) चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े के मुताबिक बनाए गए हैं
17وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا
और वहाँ उन्हें ऐसी शराब पिलाई जाएगी जिसमें जनजबील (के पानी) की आमेज़िश होगी
18عَيْنًا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًا
ये बेहश्त में एक चश्मा है जिसका नाम सलसबील है
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अल-इंसान 16

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Wednesday, September 30, 2026

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