अल-इंसान · 23/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْقُرْآنَ تَنزِيلًا ۝٢٣
Innaa nahnu nazzalnaa `alaikal quraana tanzeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके नाज़िल किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नज़्ज़लना (نَزَّلْنَا): हमने उतारा — यहाँ "तनज़ील" का शब्द इस्तेमाल हुआ है जो क्रमिक रूप से, थोड़ा-थोड़ा करके उतारने को दर्शाता है।
  • तनज़ीलन (تَنزِيلًا): यह शब्द अपने आप में ताकीद (emphasis) के लिए आया है, यानी सचमुच क़ुरआन को हमने ही उतारा है, और इसे इस तरह उतारा गया कि कोई इसमें किसी और का दख़ल नहीं।

तफ़सीर:

ऐ नबी! यह बात पूरे यक़ीन और सख़्त ताकीद के साथ कही जा रही है कि यह क़ुरआन हमने ही आप पर उतारा है — कोई और इसमें शामिल नहीं। यह कोई साधारण किताब नहीं है जो एक बार में उतार दी गई हो, बल्कि इसे हमने थोड़ा-थोड़ा करके, हालात और ज़रूरतों के मुताबिक़, आयत-दर-आयत उतारा है। इसका उतारना हमारी अपनी योजना और हिकमत से हुआ है।

यह तनज़ील (क्रमिक उतारना) अपने आप में एक बहुत बड़ी रहमत है। अगर यह किताब एक ही बार में उतार दी जाती, तो लोगों के लिए इसे समझना और इस पर अमल करना मुश्किल होता। लेकिन अल्लाह ने इसे धीरे-धीरे इसलिए उतारा ताकि लोग इसे आसानी से सीखें, समझें, और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। हर नई आयत के साथ नई रोशनी मिलती गई, हर मुश्किल का हल मिलता गया, और ईमान वालों के दिल मज़बूत होते गए।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली दे रहे हैं कि यह क़ुरआन जो आप पर उतरा है, यह हमारी तरफ़ से है — इसमें कोई शक नहीं। और यह भी बता रहे हैं कि इस किताब का मक़सद सिर्फ़ पढ़ना नहीं, बल्कि लोगों को उन वादों और वायदों से आगाह करना है जो इसमें हैं — जन्नत की ख़ुशख़बरी और जहन्नम का डर, नेकी का इनाम और गुनाह की सज़ा।

और यही वह किताब है जो आज भी हर इंसान के लिए रहनुमा है। जो इसे पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं होता। जो इस पर अमल करता है, उसकी ज़िंदगी बदल जाती है। यह किताब क़यामत तक के लिए रौशनी है — और यही अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है जो उसने अपने बंदों पर की है।

तो ऐ इंसान! इस क़ुरआन को पढ़, समझ, और उस पर अमल कर। यही तेरी कामयाबी की चाबी है। यह अल्लाह की तरफ़ से तेरे लिए रहमत और हिदायत है — इसे हाथ से मत जाने दे।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अल-इंसान

21عَالِيَهُمْ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضْرٌ وَإِسْتَبْرَقٌ ۖ وَحُلُّوا أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٍ وَسَقَاهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًا طَهُورًا
उनके ऊपर सब्ज़ क्रेब और अतलस की पोशाक होगी और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका परवरदिगार उन्हें निहायत पाकीज़ा शराब पिलाएगा
22إِنَّ هَٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَاءً وَكَانَ سَعْيُكُم مَّشْكُورًا
ये यक़ीनी तुम्हारे लिए होगा और तुम्हारी (कारगुज़ारियों के) सिले में और तुम्हारी कोशिश क़ाबिले शुक्र गुज़ारी है
23إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْقُرْآنَ تَنزِيلًا
(ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके नाज़िल किया
24فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ آثِمًا أَوْ كَفُورًا
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तज़ार में सब्र किए रहो और उन लोगों में से गुनाहगार और नाशुक्रे की पैरवी न करना
25وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
सुबह शाम अपने परवरदिगार का नाम लेते रहो
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीRevelation
23आयत

अनुवाद — अल-इंसान 23

सूरा अल-इंसान आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके…

सूरा आयत 23/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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