अल-इंसान · 9/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا ۝٩
Innaamaa nut`imukum li wajhil laahi laa nureedu minkum jazaaa`anw wa laa shukooraa
📖 हिंदी अर्थ
(और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा के लिए खिलाते हैं हम न तुम से बदले के ख़ास्तगार हैं और न शुक्र गुज़ारी के
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِوَجْهِ اللهِ: केवल अल्लाह की रज़ा और उसकी खुशी के लिए।
  • جَزَاءً: बदला, पुरस्कार, कोई मुआवज़ा।
  • شُكُورًا: धन्यवाद, प्रशंसा, आभार प्रकट करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक लोगों के दिल की गहराईयों को उजागर करती है जो अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं। ये लोग जब भूखे, अनाथ और कैदियों को खाना खिलाते हैं, तो उनके दिलों में केवल एक ही नियत होती है — अल्लाह का चेहरा (उसकी रज़ा)। वे अपने मुँह से यह बात नहीं कहते, बल्कि उनका यह विश्वास और उनकी नीयत उनके दिल में होती है कि हम तुम्हें केवल अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं। वे न तो तुमसे कोई बदला चाहते हैं, न ही तुम्हारी तरफ से कोई प्रशंसा या धन्यवाद की उम्मीद रखते हैं। उनका यह काम पूरी तरह से निष्कपट और खालिस होता है, जिसमें दिखावे या स्वार्थ का कोई मिश्रण नहीं होता।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इंसान वही है जो अल्लाह की राह में दूसरों की मदद करे और बदले में कुछ भी न चाहे — न दुनिया का माल, न तारीफ, न शुक्रिया। ऐसा इंसान अपने अमल को केवल अल्लाह के सामने पेश करता है, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह ही सब कुछ देने वाला है और उसकी रज़ा ही सबसे बड़ी कामयाबी है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें उस ऊँचे मक़ाम की तरफ बुलाती है जहाँ इंसान का अमल खालिस हो जाता है। जब हम किसी की मदद करें, तो दिल में यही जज़्बा हो कि हम अल्लाह के लिए कर रहे हैं। याद रखिए, अल्लाह उसी अमल को क़ुबूल करता है जो सिर्फ उसकी खातिर किया जाए। अगर हम अपने अमल में रिया (दिखावा) या दुनिया की उम्मीदें मिला लें, तो हमारा अमल कमज़ोर हो जाता है। लेकिन जो इंसान खालिस नीयत से अल्लाह की राह में खर्च करता है, अल्लाह उसे ऐसा इनाम देता है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत के उन दरवाज़ों तक पहुँचाता है जिनका ज़िक्र इस सूरह में आगे आता है। आइए, हम अपने दिलों को इस नीयत से पाक करें कि हर नेक काम सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए हो — तभी हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी और हम उन नेक बंदों में शामिल होंगे जिनकी तारीफ़ अल्लाह ने अपनी किताब में की है।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-इंसान

7يُوفُونَ بِالنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُ مُسْتَطِيرًا
ये वह लोग हैं जो नज़रें पूरी करते हैं और उस दिन से जिनकी सख्ती हर तरह फैली होगी डरते हैं
8وَيُطْعِمُونَ الطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا
और उसकी मोहब्बत में मोहताज और यतीम और असीर को खाना खिलाते हैं
9إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا
(और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा के लिए खिलाते हैं हम न तुम से बदले के ख़ास्तगार हैं और न शुक्र गुज़ारी के
10إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا
हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी
11فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
अल-इंसानकुरान सूची
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9आयत

अनुवाद — अल-इंसान 9

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Tuesday, August 18, 2026

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