Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِوَجْهِ اللهِ: केवल अल्लाह की रज़ा और उसकी खुशी के लिए।
- جَزَاءً: बदला, पुरस्कार, कोई मुआवज़ा।
- شُكُورًا: धन्यवाद, प्रशंसा, आभार प्रकट करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन नेक लोगों के दिल की गहराईयों को उजागर करती है जो अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं। ये लोग जब भूखे, अनाथ और कैदियों को खाना खिलाते हैं, तो उनके दिलों में केवल एक ही नियत होती है — अल्लाह का चेहरा (उसकी रज़ा)। वे अपने मुँह से यह बात नहीं कहते, बल्कि उनका यह विश्वास और उनकी नीयत उनके दिल में होती है कि हम तुम्हें केवल अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं। वे न तो तुमसे कोई बदला चाहते हैं, न ही तुम्हारी तरफ से कोई प्रशंसा या धन्यवाद की उम्मीद रखते हैं। उनका यह काम पूरी तरह से निष्कपट और खालिस होता है, जिसमें दिखावे या स्वार्थ का कोई मिश्रण नहीं होता।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इंसान वही है जो अल्लाह की राह में दूसरों की मदद करे और बदले में कुछ भी न चाहे — न दुनिया का माल, न तारीफ, न शुक्रिया। ऐसा इंसान अपने अमल को केवल अल्लाह के सामने पेश करता है, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह ही सब कुछ देने वाला है और उसकी रज़ा ही सबसे बड़ी कामयाबी है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें उस ऊँचे मक़ाम की तरफ बुलाती है जहाँ इंसान का अमल खालिस हो जाता है। जब हम किसी की मदद करें, तो दिल में यही जज़्बा हो कि हम अल्लाह के लिए कर रहे हैं। याद रखिए, अल्लाह उसी अमल को क़ुबूल करता है जो सिर्फ उसकी खातिर किया जाए। अगर हम अपने अमल में रिया (दिखावा) या दुनिया की उम्मीदें मिला लें, तो हमारा अमल कमज़ोर हो जाता है। लेकिन जो इंसान खालिस नीयत से अल्लाह की राह में खर्च करता है, अल्लाह उसे ऐसा इनाम देता है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत के उन दरवाज़ों तक पहुँचाता है जिनका ज़िक्र इस सूरह में आगे आता है। आइए, हम अपने दिलों को इस नीयत से पाक करें कि हर नेक काम सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए हो — तभी हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी और हम उन नेक बंदों में शामिल होंगे जिनकी तारीफ़ अल्लाह ने अपनी किताब में की है।
📜 आयत 7-11 — सूरा अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 9
सूरा अल-इंसान आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा…सूरा आयत 9/31 — सूरा अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इंसान सुनें, सूरा अल-इंसान अनुवाद, सूरा अल-इंसान mp3, सूरा अल-इंसान pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इंसान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


