अल-मुरसलात · 14/50
अनुवाद उच्चारण — अल-मुरसलात
وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الْفَصْلِ ۝١٤
Wa maaa adraaka maa yawmul fasl
📖 हिंदी अर्थ
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَوْمُ الْفَصْلِ: फैसले का दिन, यानी वह दिन जब सभी प्राणियों के बीच न्याय किया जाएगा।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उस महान दिन की अज़मत और हैबत बयान कर रहे हैं, जब सारी मख़लूक़ात को इकट्ठा किया जाएगा और उनके आमाल का फैसला होगा। यह वह दिन है जब आसमान फट जाएगा, सितारे बिखर जाएंगे, पहाड़ उड़ती हुई धूल की तरह हो जाएंगे, और रसूलों को उनकी उम्मतों के साथ फैसले के लिए पेश किया जाएगा। यह दिन इतना हौलनाक और अज़ीम है कि अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को भी ख़िताब करके फ़रमाया: "और तुम्हें क्या मालूम कि फैसले का दिन क्या है?" यानी इस दिन की हैसियत और सख़्ती का अंदाज़ा लगाना इंसान की समझ से बाहर है, क्योंकि इससे मिलता-जुलता कोई दिन इस दुनिया में नहीं आया और न ही कोई इंसान इसका सही इदराक कर सकता है।

यह वह दिन है जब हर इंसान से उसके नेक और बुरे आमाल का हिसाब लिया जाएगा, और हर शख्स को उसके किए का बदला मिलेगा। नेक लोगों को जन्नत की नेअमतें मिलेंगी, और बुरे लोगों को जहन्नम का अज़ाब। यह दिन अल्लाह की रहमत और अद्ल का ज़बरदस्त ज़ाहिरा होगा, जहाँ कोई ज़ुल्म नहीं होगा और हर इंसान को उसकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें ग़ौर और फ़िक्र की दावत देती है। अल्लाह ने हमें बताया कि यह दिन कितना अज़ीम और सख़्त है, ताकि हम इस दुनिया में अपने आमाल को दुरुस्त करें। यह दिन हमारे लिए ख़ौफ़ और उम्मीद दोनों का ज़रिया है — ख़ौफ़ इसलिए कि हम गुनाहों से बचें, और उम्मीद इसलिए कि अल्लाह की रहमत से हम जन्नत के हक़दार बनें। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं, नेक कामों में जल्दी करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई दौलत और औलाद काम नहीं आएगी, बल्कि सिर्फ़ साफ़ दिल और नेक आमाल काम आएंगे। यह दिन हक़ है, और इस पर ईमान लाना हमारी कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह हमें उस दिन के अज़ाब से बचाए और अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 12-16 — अल-मुरसलात

12لِأَيِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है
13لِيَوْمِ الْفَصْلِ
फ़ैसले के दिन के लिए
14وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الْفَصْلِ
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है
15وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
16أَلَمْ نُهْلِكِ الْأَوَّلِينَ
क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया
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अनुवाद — अल-मुरसलात 14

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Tuesday, August 18, 2026

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