Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَنذَرْنَاكُمْ – हमने तुम्हें सचेत कर दिया
- عَذَابًا قَرِيبًا – ऐसा अज़ाब जो बहुत करीब है
- يَنظُرُ الْمَرْءُ – हर इंसान देखेगा
- مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ – जो उसके हाथों ने आगे भेजा (अर्थात उसके कर्म)
- يَا لَيْتَنِي كُنتُ تُرَابًا – काश! मैं मिट्टी होता
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को आख़िरत के उस अज़ाब से डरा रहा है जो बहुत करीब है। यह अज़ाब क़यामत का अज़ाब है, और हर वो चीज़ जो आने वाली है वह करीब ही है, चाहे वह कितनी ही दूर क्यों न हो। अल्लाह फ़रमाता है: हमने तुम्हें उस दिन के अज़ाब से आगाह कर दिया है, जिस दिन हर शख्स अपने सामने वह सब कुछ पाएगा जो उसने दुनिया में भेजा था — नेकी हो या गुनाह। उस दिन इंसान अपने किए हुए हर अमल को अपनी आँखों के सामने देखेगा, और उसके हाथ, पैर, ज़ुबान — सब उसके खिलाफ़ गवाही देंगे।
उस वक़्त का मंज़र बड़ा भयानक होगा। जब काफ़िर उस हिसाब की सख़्ती और अज़ाब की दहशत देखेगा, तो हैरत और पछतावे के मारे कहेगा: "काश! मैं मिट्टी होता!" यानी काश मैं उन जानवरों की तरह होता जिन्हें क़यामत के दिन मिट्टी बना दिया जाएगा, ताकि मुझे हिसाब और अज़ाब का सामना न करना पड़े। यह उसकी सबसे बड़ी आरज़ू होगी — मिट्टी बन जाना, ताकि वह इस भयानक अज़ाब से बच जाए।
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें दुनिया में रहते हुए आगाह कर दिया है, ताकि हम अपने कर्मों को सँवार लें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें मौका दिया है — तौबा करने का, नेकियाँ बढ़ाने का, और उस अज़ाब से बचने का। आज हमारे पास वक़्त है, कल नहीं होगा। आज हम अपने हाथों से जो कुछ भेजेंगे, कल उसे ही देखेंगे। अगर आज हम नेकियाँ भेजेंगे, तो कल वही हमारी शफ़ाअत करेंगी; और अगर गुनाह भेजेंगे, तो वही हमारे लिए अज़ाब का सबब बनेंगे।
इसलिए ऐ बंदे! इस दुनिया को मौके की नज़र से देख। यहाँ से जो कुछ भी तू आगे भेजेगा, वही तेरी पकड़ में आएगा। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है — तौबा कर, अपने अमल दुरुस्त कर, और उस दिन की रुसवाई से बच जा जब काफ़िर सिर्फ़ यही कह सकेगा: "काश! मैं मिट्टी होता।" लेकिन उस दिन यह कहना किसी काम नहीं आएगा। आज का दिन अमल का है, कल का दिन हिसाब का। अल्लाह हमें उस दिन की दहशत से बचाए और हमारे अमल को नेक बनाए। आमीन।
📜 आयत 38-40 — सूरा अन-नबा
अनुवाद — अन-नबा 40
सूरा अन-नबा आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने तुम लोगों को अनक़रीब आने वाले अज़ाब से डरा…सूरा आयत 40/40 — सूरा अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नबा सुनें, सूरा अन-नबा अनुवाद, सूरा अन-नबा mp3, सूरा अन-नबा pdf. आयत 38–40. हिंदी अर्थ: اردو.
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Saturday, October 3, 2026
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