अन-नाज़ियात · 39/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ ۝٣٩
Fa innal jaheema hiyal maawaa
📖 हिंदी अर्थ
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الجَحِيم: अत्यंत भयंकर और धधकती हुई आग, जो जलाने वाली है। यह नरक के नामों में से एक है।
  • المَأْوَى: वह स्थान जहाँ कोई व्यक्ति लौटकर आए और जहाँ वह ठहरे, यानी आश्रय और निवास स्थान।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के भाग्य का वर्णन कर रही है जिन्होंने अपने रब के आदेशों की अवहेलना की, उसकी नाफ़रमानी की और सांसारिक जीवन को आख़िरत पर प्राथमिकता दी। ऐसे लोगों के लिए अंतिम परिणाम यह है कि उनका ठिकाना जहन्नुम (नरक) की आग होगी। यह कोई साधारण आग नहीं, बल्कि वह भयंकर जलाने वाली आग है जो दिलों तक पहुँचती है और जिससे कोई राहत नहीं मिलती। यही उनका स्थायी आश्रय होगा, जहाँ वे हमेशा के लिए रहेंगे।

यह आयत हमें एक गंभीर सत्य की याद दिलाती है कि हमारे इस दुनिया के कार्यों का परिणाम आख़िरत में अवश्य मिलेगा। जो लोग अपनी इच्छाओं के गुलाम बनकर रह गए और अल्लाह की राह को भूल गए, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन यही आयत हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी — कि हम अभी भी अपने जीवन को सुधार सकते हैं, अल्लाह की ओर लौट सकते हैं, और उस आग से बच सकते हैं। अल्लाह तआला बड़ा दयालु और क्षमाशील है; वह चाहता है कि हम उसकी ओर लौटें और उसकी रहमत के साये में आएँ। याद रखिए, यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है, लेकिन आख़िरत का जीवन अनंत है। समझदार वही है जो इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बिताए और उस आग से बचने का रास्ता अपनाए।



📜 आयत 37-41 — सूरा अन-नाज़ियात

37فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था
38وَآثَرَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
39فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
40وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
41فَإِنَّ الْجَنَّةَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है
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39आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 39

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Thursday, October 1, 2026

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