अन-नाज़ियात · 40/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ ۝٤٠
Wa ammaa man khaafa maqaama Rabbihee wa nahan nafsa `anil hawaa
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ: अपने रब के सामने खड़े होने (हिसाब के लिए) का भय रखा।
  • نَهَى النَّفْسَ: अपने नफ्स (अस्वयं) को रोका।
  • الهَوَىٰ: वह इच्छाएँ और ख्वाहिशें जो अल्लाह की नाराज़गी का कारण बनें, विशेष रूप से वर्जित (हराम) चीज़ों की तरफ ले जाने वाली।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का ज़िक्र कर रहे हैं जो क़यामत के दिन की सफलता और कामयाबी पाने वाले हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि जिस शख्स ने अपने रब के सामने हाज़िर होने और उसके हिसाब का भय अपने दिल में रखा, और उस भय की बदौलत अपने नफ्स को उसकी बुरी इच्छाओं और ख्वाहिशों से रोका — यानी जो चीज़ें अल्लाह ने हराम की हैं, उनसे बचा, और अपनी जायज़ इच्छाओं को भी अल्लाह की रज़ा के ताबे कर दिया — तो उसके लिए जन्नत ही उसका ठिकाना और घर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सबसे बड़ी जंग इंसान की अपने नफ्स के साथ है। नफ्स इंसान को बुराई की तरफ खींचता है, लेकिन जो शख्स अल्लाह के डर की वजह से उसे रोक लेता है, वही असली कामयाब है। अल्लाह का डर ही वह चाबी है जो इंसान को जन्नत के दरवाज़े तक पहुँचाती है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का डर कोई बुरी चीज़ नहीं, बल्कि यही डर हमें जन्नत तक पहुँचाने वाला ज़रिया है। जब हमारे दिल में यह यक़ीन हो जाए कि हमें एक दिन अल्लाह के सामने खड़ा होना है और हर अच्छे-बुरे काम का हिसाब देना है, तो हमारे अंदर खुद-ब-खुद बुराई से बचने की ताकत पैदा हो जाती है। यह डर हमें गुनाहों से दूर रखता है और नेकी की तरफ ले जाता है। अल्लाह तआला ने अपने रहमत भरे कलाम में हमें यह खुशखबरी दी है कि जो लोग अपने नफ्स को काबू में रखेंगे, उनके लिए जन्नत तैयार है। तो आइए, हम अपने अंदर अल्लाह का डर पैदा करें, अपनी इच्छाओं को अल्लाह की रज़ा पर कुर्बान करें, और उस कामयाबी को हासिल करें जो हमेशा रहने वाली है।



📜 आयत 38-42 — अन-नाज़ियात

38وَآثَرَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
39فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
40وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
41فَإِنَّ الْجَنَّةَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है
42يَسْأَلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَاهَا
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 40

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Tuesday, August 18, 2026

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