अन-नाज़ियात · 38/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
وَآثَرَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا ۝٣٨
Wa aasaral hayaatad dunyaa
📖 हिंदी अर्थ
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَآثَرَ: चुना, प्राथमिकता दी, तरजीह दी।
  • الْحَيَاةَ الدُّنْيَا: सांसारिक जीवन, यानी यह फ़ानी (नाशवान) दुनिया जो मरने के बाद ख़त्म हो जाती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जिन्होंने अपने रब के हुक्म की नाफ़रमानी की और अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों और लज़्ज़तों को ही अपना निशाना बना लिया। उन्होंने उस आख़िरत को भुला दिया जो हमेशा रहने वाली है, और उस फ़ानी दुनिया को पसंद कर लिया जो कुछ दिनों की ज़िंदगी है। उन्होंने शहवतों (इच्छाओं) की पैरवी की और अल्लाह की राह को छोड़ दिया। उन्होंने दुनिया की चमक-दमक और माल-दौलत को आख़िरत की हमेशा रहने वाली नेमतों पर तरजीह दी। यह उनका सबसे बड़ा नुक़सान है कि उन्होंने बाक़ी रहने वाली चीज़ को छोड़कर फ़ानी चीज़ को पकड़ लिया।

यह आयत हमें बताती है कि इंसान की कामयाबी इसी में है कि वह दुनिया को आख़िरत पर तरजीह न दे। दुनिया एक खेती है और आख़िरत उसकी फ़सल। जो इंसान यहाँ अच्छे काम करेगा, वहीं उसे आख़िरत में अच्छा बदला मिलेगा। अल्लाह तआला ने इंसान को अक़्ल दी है ताकि वह सोचे-समझे और सही रास्ता चुने। जो लोग दुनिया की चकाचौंध में खो जाते हैं और अल्लाह के हुक्मों को भूल जाते हैं, वे आख़िरकार पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करते। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं और आख़िरत को अपना असली घर समझते हैं, वे दुनिया में भी इज़्ज़त से रहते हैं और आख़िरत में भी कामयाब होते हैं। अल्लाह तआला हमें दुनिया और आख़िरत के बीच सही तालमेल बिठाने की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में से बनाए जो आख़िरत को तरजीह देते हैं। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 36-40 — अन-नाज़ियात

36وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
37فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था
38وَآثَرَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
39فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
40وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 38

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Tuesday, August 18, 2026

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