अन-नाज़ियात · 41/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
فَإِنَّ الْجَنَّةَ هِيَ الْمَأْوَىٰ ۝٤١
Fa innal jannata hiyal maawaa
📖 हिंदी अर्थ
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْجَنَّةَ: जन्नत (स्वर्ग), जो ईमानवालों के लिए अल्लाह की ओर से तैयार की गई स्थायी नेमतों का घर है।
  • الْمَأْوَى: वह स्थान जहाँ इंसान आराम और सुकून के लिए लौटता है, यानी आश्रय और ठिकाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का अंजाम बयान कर रहे हैं जिन्होंने अपने रब के सामने खड़े होने का खौफ रखा और अपनी नफ्स (मन की इच्छाओं) को उन चीज़ों से रोका जो अल्लाह ने हराम (निषिद्ध) की हैं। ऐसे लोगों के लिए यह खुशखबरी है कि उनका आख़िरी ठिकाना जन्नत होगी—वह पवित्र और हमेशा रहने वाला घर, जहाँ हर तरह की राहत, सुकून और खुशियाँ मौजूद हैं। यह जन्नत उनके लिए एकमात्र आश्रय है, और उनके सिवा उनका कोई और ठिकाना नहीं होगा। यह अल्लाह का वादा है जो कभी टलने वाला नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक प्यारी खुशखबरी है जो अपनी ज़िंदगी में अल्लाह से डरता है और अपनी बुरी इच्छाओं पर काबू पाता है। यह हमें सिखाती है कि दुनिया की चुनौतियों और मुश्किलों के बावजूद, जो व्यक्ति अल्लाह की राह पर चलता है और अपने नफ्स को काबू में रखता है, उसका अंजाम बेहतरीन है। जन्नत की याद हमारे दिलों को सुकून देती है और हमें अच्छे कामों की तरफ प्रेरित करती है। आओ, हम अपने रब के सामने जवाबदेही के दिन को याद रखें और अपनी ज़िंदगी को उस तरह ढालें जो अल्लाह को पसंद है, ताकि हम भी उस हमेशा रहने वाली जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 39-43 — सूरा अन-नाज़ियात

39فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
40وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
41فَإِنَّ الْجَنَّةَ هِيَ الْمَأْوَىٰ
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है
42يَسْأَلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَاهَا
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं
43فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَاهَا
कि उसका कहीं थल बेड़ा भी है
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 41

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Monday, September 28, 2026

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