अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- السَّاعَةِ (अस-साआह): क़ियामत, वह घड़ी जिसमें सब मरकर जी उठेंगे।
- أَيَّانَ (अय्यान): कब, किस समय।
- مُرْسَاهَا (मुर्साहा): इसका आना, इसका घटित होना, यानी क़ियामत के क़ायम होने का समय।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! ये मुशरिक और मुनकिर लोग आपसे पूछते हैं कि क़ियामत कब आएगी? ये सवाल वे मज़ाक़ और इस्तेहज़ा (उपहास) के तौर पर पूछते हैं, क्योंकि उन्हें उस दिन के आने पर यक़ीन नहीं। वे सोचते हैं कि ये बातें महज़ कहानियाँ हैं, इसलिए वे आपसे बार-बार पूछते हैं कि बताओ वो घड़ी कब आएगी?
आपका काम उसका समय बताना नहीं है। उसका इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है। आपका काम तो सिर्फ़ लोगों को उस दिन से डराना और सावधान करना है। जब वो दिन आएगा, तो लोग अपनी ज़िंदगी को बहुत कम महसूस करेंगे — जैसे दुनिया में उनका ठहराव सिर्फ़ एक दिन का हिस्सा था, सुबह से दोपहर तक या दोपहर से सूरज डूबने तक। उस दिन की हैबत और दहशत इतनी ज़बरदस्त होगी कि उन्हें अपनी पूरी ज़िंदगी बहुत थोड़ी लगेगी।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
ऐ बंदे! क़ियामत का समय जानना तेरे काम की चीज़ नहीं है। तेरा काम है उस दिन के लिए तैयारी करना। जो शख्स उस दिन पर ईमान रखता है और उसकी फ़िक्र करता है, वह कभी गुनाहों में नहीं डूबता। वह जानता है कि आज की मोहलत कल की पकड़ से बचने का ज़रिया है। अल्लाह ने हमें वक़्त दिया है ताकि हम तौबा करें, नेकियाँ कमाएँ और उस दिन के लिए ज़ाद-ए-राह (सफ़र का सामान) इकट्ठा करें। क़ियामत का इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है, लेकिन उसका आना यक़ीनी है। इसलिए हमें उस दिन के लिए ऐसे तैयार रहना चाहिए जैसे वो कल ही आने वाला है। यही ईमानवाले की पहचान है — कि वो उस दिन से डरता है और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखता है।
📜 आयत 40-44 — अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 42
सूरा अन-नाज़ियात आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते…सूरा आयत 42/46 — अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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