Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَصُدُّونَ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ: वे लोगों को मस्जिद-ए-हराम (काबा) से रोकते हैं, यानी मुसलमानों को वहाँ तवाफ़ और नमाज़ के लिए जाने से रोकते हैं।
- أَوْلِيَاءَهُ: इसके (मस्जिद-ए-हराम के) संरक्षक या अधिकारी।
- الْمُتَّقُونَ: वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला काफ़िरों को चेतावनी देते हुए फ़रमाता है कि उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचने का कोई हक़ या कारण नहीं है। वे कैसे यह उम्मीद रखते हैं कि उन्हें अज़ाब न दिया जाए, जबकि उनका हाल यह है कि वे मुसलमानों को मस्जिद-ए-हराम (काबा) में आने से रोकते हैं, तवाफ़ और नमाज़ अदा करने से रोकते हैं? यह उनका कृत्य अज़ाब का सबसे बड़ा कारण है।
फिर अल्लाह तआला उनके उस दावे का खंडन करता है जो वे करते थे। काफ़िर कहते थे कि हम इस घर (काबा) के संरक्षक और अधिकारी हैं, इसलिए हमें अधिकार है कि जिसे चाहें अंदर आने दें और जिसे चाहें रोक दें। अल्लाह फ़रमाता है: ये काफ़िर इस घर के संरक्षक नहीं हैं। इस घर के असली संरक्षक तो केवल वही लोग हैं जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी इबादत करते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और शिर्क व गुनाहों से बचते हैं। यह घर तो अल्लाह का है, और अल्लाह के निकट वही लोग इसके संरक्षक हो सकते हैं जो उसके प्रति सच्चे और नेक हों।
लेकिन इन काफ़िरों में से अधिकतर लोग इस सच्चाई को नहीं जानते। वे अज्ञानता और घमंड के कारण अपने आपको इस घर का असली मालिक समझते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि वे न तो इस घर के संरक्षक हैं और न ही उन्हें यह अधिकार है कि वे अल्लाह के बंदों को उसके घर से रोकें।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादतगाहों (मस्जिदों) का सम्मान करना और वहाँ आने-जाने में किसी को रोकना बहुत बड़ा पाप है। जो लोग अल्लाह के घरों से लोगों को रोकते हैं, वे अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बन जाते हैं।
- अल्लाह की इबादतगाहों का असली संरक्षक वही है जो अल्लाह से डरता है और नेकी पर चलता है, न कि वह जो केवल दावा करता है। इससे हमें सीख मिलती है कि धार्मिक स्थानों और इस्लामी मामलों में अधिकार उन्हीं को देना चाहिए जो सच्चे मुतक़ी (परहेज़गार) हों।
- यह आयत मुसलमानों को धैर्य और सच्चाई पर क़ायम रहने की ताक़त देती है, क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को सज़ा देता है।
- अज्ञानता इंसान को ऐसे ग़लत दावे करने पर मजबूर करती है जो उसके लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए हमें ज्ञान हासिल करना चाहिए और अल्लाह की नेकी वाली राह पर चलना चाहिए।
📜 आयत 32-36 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 34
सूरा अल-अनफाल आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब ये लोग लोगों को मस्जिदुल हराम (ख़ान ए…सूरा आयत 34/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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