अल-अनफाल · 35/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِندَ الْبَيْتِ إِلَّا مُكَاءً وَتَصْدِيَةً ۚ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ ۝٣٥
Wa maa kaana Salaatuhum `indal Baiti illa mukaaa anw-wa tasdiyah; fazooqul `azaaba bimaa kuntum takfuroon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ानाए काबे के पास सीटियॉ तालिया बजाने के सिवा उनकी नमाज ही क्या थी तो (ऐ काफिरों) जब तुम कुफ्र किया करते थे उसकी सज़ा में (पड़े) अज़ाब के मज़े चखो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُكَاءً (मुकाअन): मुँह से सीटी बजाना।
  • تَصْدِيَةً (तस्दियाह): ताली बजाना, एक हाथ को दूसरे हाथ पर मारना।
  • الْبَيْتِ (अल-बैत): यहाँ अर्थ है मस्जिद-ए-हराम (काबा)।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला मक्का के मुशरिकों के उस कृत्य का वर्णन कर रहे हैं, जो वे बैतुल्लाह (काबा) के पास किया करते थे। उनकी नमाज़ या इबादत, जिसे वे अपनी पूजा कहते थे, केवल सीटी बजाना और ताली बजाना थी। वे काबा के पास आकर शोर मचाते, सीटियाँ बजाते और तालियाँ पीटते थे, ताकि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और मुसलमानों को परेशान कर सकें और उनकी इबादत में खलल डाल सकें। यह उनकी इबादत का अंजाम था—न कोई वास्तविक नमाज़, न विनम्रता, बल्कि खेल-तमाशा और उपहास।

इसके बाद अल्लाह तआला ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा: "तो अब तुम इस कुफ्र और इन कार्यों के बदले में अज़ाब (यातना) का स्वाद चखो।" यह अज़ाब बद्र के दिन उन पर आया, जब वे मारे गए और बंदी बनाए गए। यह उनके कुफ्र और अल्लाह की आयतों को झुठलाने का परिणाम था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इबादत का वास्तविक अर्थ अल्लाह के सामने विनम्रता और खुशू (ध्यान) है, न कि शोर और खेल-तमाशा। अल्लाह उसी इबादत को क़ुबूल करता है जो सच्चे दिल और ख़ालिस नीयत से की जाए।
  2. अल्लाह की इबादत का मज़ाक उड़ाना और उसमें रुकावट डालना बहुत बड़ा पाप है, और इसका अंजाम दुनिया और आख़िरत में बुरा होता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नाराज़गी का सामना करने वालों को दुनिया में भी सज़ा मिल सकती है, जैसे बद्र के दिन मुशरिकों को मिली। इसलिए हमें अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए।
  4. मुसलमानों को चाहिए कि वे अपनी नमाज़ और इबादत को सही तरीके से अदा करें, क्योंकि यही उनकी पहचान है और यही उन्हें अल्लाह के करीब लाती है।


📜 आयत 33-37 — सूरा अल-अनफाल

33وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُمْ وَأَنتَ فِيهِمْ ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ مُعَذِّبَهُمْ وَهُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
हालॉकि जब तक तुम उनके दरमियान मौजूद हो ख़ुदा उन पर अज़ाब नहीं करेगा और अल्लाह ऐसा भी नही कि लोग तो उससे अपने गुनाहो की माफी माँग रहे हैं और ख़ुदा उन पर नाज़िल फरमाए
34وَمَا لَهُمْ أَلَّا يُعَذِّبَهُمُ اللَّهُ وَهُمْ يَصُدُّونَ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَمَا كَانُوا أَوْلِيَاءَهُ ۚ إِنْ أَوْلِيَاؤُهُ إِلَّا الْمُتَّقُونَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और जब ये लोग लोगों को मस्जिदुल हराम (ख़ान ए काबा की इबादत) से रोकते है तो फिर उनके लिए कौन सी बात बाक़ी है कि उन पर अज़ाब न नाज़िल करे और ये लोग तो ख़ानाए काबा के मुतवल्ली भी नहीं (फिर क्यों रोकते है) इसके मुतवल्ली तो सिर्फ परहेज़गार लोग हैं मगर इन काफ़िरों में से बहुतेरे नहीं जानते
35وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِندَ الْبَيْتِ إِلَّا مُكَاءً وَتَصْدِيَةً ۚ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
और ख़ानाए काबे के पास सीटियॉ तालिया बजाने के सिवा उनकी नमाज ही क्या थी तो (ऐ काफिरों) जब तुम कुफ्र किया करते थे उसकी सज़ा में (पड़े) अज़ाब के मज़े चखो
36إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें
37لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 35

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Monday, September 28, 2026

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