अत-तकवीर · 18/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तकवीर
وَالصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ ۝١٨
Wassubhi izaa tanaffas
📖 हिंदी अर्थ
और सुबह की क़सम जब रौशन हो जाए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالصُّبْحِ: सुबह, प्रातःकाल
  • إِذَا تَنَفَّسَ: जब वह साँस ले, अर्थात जब उसका प्रकाश फैल जाए और उजाला पूरी तरह से छा जाए

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में सुबह की क़सम खाई है, जब वह साँस लेती है। यह एक बहुत ही खूबसूरत और लतीफ़ अंदाज़ में बयान की गई बात है। जिस तरह इंसान साँस लेता है और उसकी साँस से ज़िंदगी फैलती है, उसी तरह सुबह का उजाला जब फैलता है तो अंधेरी रात के बाद रौशनी दुनिया में छा जाती है। यह एक नई ज़िंदगी का पैग़ाम लेकर आती है।

जब रात का अंधेरा छंटता है और सुबह की पहली किरण निकलती है, तो ऐसा लगता है जैसे सुबह ने गहरी साँस ली हो और उसकी साँसों से रौशनी, ताज़गी और ज़िंदगी बिखर गई हो। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीम नमूना है कि वह रात के बाद सुबह लाता है, अंधेरे के बाद रौशनी, और मुसीबत के बाद आसानी।

इस क़सम से अल्लाह तआला हमें यह सिखाना चाहते हैं कि जिस तरह सुबह का आना तय है, उसी तरह हक़ (सत्य) का फैलना भी तय है। अंधेरा चाहे कितना भी घना हो, सुबह ज़रूर आती है। यही इस्लाम का पैग़ाम है—उम्मीद, रौशनी और हिदायत का। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उनके लिए हर अंधेरी रात के बाद सुबह की रौशनी ज़रूर आती है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह तआला ने अपने कलाम (क़ुरआन) की अज़मत और बुलंदी के लिए ऐसी चीज़ों की क़सम खाई है जो इंसान की ज़िंदगी में बेहद अहमियत रखती हैं। सुबह का वक़्त बरकत वाला है, और इसी वक़्त में फज्र की नमाज़ अदा की जाती है। यह वक़्त उन लोगों के लिए रहमत है जो अल्लाह की इबादत के लिए उठते हैं और अपने दिन की शुरुआत अल्लाह के ज़िक्र से करते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में कभी निराश नहीं होना चाहिए। जिस तरह सुबह का उजाला रात के अंधेरे को मिटा देता है, उसी तरह अल्लाह की रहमत और मदद हर मुश्किल को आसान कर देती है। हमें चाहिए कि हम हर सुबह अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में अपना दिन गुज़ारें।



📜 आयत 16-20 — सूरा अत-तकवीर

16الْجَوَارِ الْكُنَّسِ
और ग़ायब होते हैं
17وَاللَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
और रात की क़सम जब ख़त्म होने को आए
18وَالصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
और सुबह की क़सम जब रौशन हो जाए
19إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
कि बेशक यें (क़ुरान) एक मुअज़िज़ फरिश्ता (जिबरील की ज़बान का पैग़ाम है
20ذِي قُوَّةٍ عِندَ ذِي الْعَرْشِ مَكِينٍ
जो बड़े क़वी अर्श के मालिक की बारगाह में बुलन्द रुतबा है
अत-तकवीरकुरान सूची
29आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अत-तकवीर 18

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Friday, October 2, 2026

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