अत-तकवीर · 17/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तकवीर
وَاللَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ ۝١٧
Wallaili izaa `as`as
📖 हिंदी अर्थ
और रात की क़सम जब ख़त्म होने को आए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَسْعَسَ का अर्थ है: रात का अपने अंधकार के साथ आगे बढ़ना (आना) या पीछे हटना (जाना)। इसमें दोनों पहलू शामिल हैं—रात की शुरुआत जब अंधकार छा जाता है, और रात का अंत जब वह विदा होने लगती है।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में रात की क़सम खाई है, जब वह अपने अंधकार के साथ आगे बढ़ती है और अपनी गहराई में समा जाती है। यह वह समय होता है जब सृष्टि सन्नाटे में डूब जाती है, लोग अपने घरों में विश्राम करते हैं, और पूरी दुनिया एक अजीब सुकून में होती है। यह रात का वह पहर है जो अल्लाह की कुदरत का एक अद्भुत नमूना है—जब अंधकार धीरे-धीरे फैलता है, तो इंसान को अपनी कमज़ोरी और अल्लाह की बेपनाह ताक़त का एहसास होता है। कुछ मुफ़स्सिरीन ने इसका मतलब रात के पीछे हटने (सुबह के क़रीब) से भी लिया है, यानी जब रात विदा होने लगती है और उजाला झलकने लगता है। दोनों ही मायनों में यह अल्लाह की इबादत और उसकी याद का बेहतरीन वक़्त है।

इस क़सम का मक़सद इंसान को उसकी ज़िंदगी के उन पलों की ओर ध्यान दिलाना है, जब वह अकेला होता है और उसके दिल में ख़ुदा की मौजूदगी का एहसास गहरा होता है। रात का अंधकार और उसका सन्नाटा हमें सिखाता है कि जिस तरह रात के बाद सुबह ज़रूर आती है, उसी तरह मुश्किलों के बाद राहत और आसानी ज़रूर आती है। यह हमारे रब की रहमत और उसकी हिकमत की निशानी है कि उसने रात को सुकून का ज़रिया बनाया और दिन को रोज़ी कमाने का।

अल्लाह तआला की इस क़सम से हमें यह सबक़ लेना चाहिए कि हम अपने जीवन के हर पल—चाहे वह रात हो या दिन—अल्लाह की इबादत और उसके शुक्र में गुज़ारें। रात के अंधकार में जब दुनिया की रौनक़ें ख़त्म हो जाती हैं, तो इंसान का दिल अल्लाह की ओर मुड़ता है, और यही वह पल है जब दुआएँ क़ुबूल होती हैं। यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की कुदरत के नज़ारे हर तरफ़ बिखरे हुए हैं, बस ज़रूरत है उन पर ग़ौर करने की। जो इंसान इन निशानियों पर दिल से ग़ौर करेगा, उसका ईमान मज़बूत होगा और वह अपने रब के क़रीब हो जाएगा।



📜 आयत 15-19 — सूरा अत-तकवीर

15فَلَا أُقْسِمُ بِالْخُنَّسِ
तो मुझे उन सितारों की क़सम जो चलते चलते पीछे हट जाते
16الْجَوَارِ الْكُنَّسِ
और ग़ायब होते हैं
17وَاللَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
और रात की क़सम जब ख़त्म होने को आए
18وَالصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
और सुबह की क़सम जब रौशन हो जाए
19إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
कि बेशक यें (क़ुरान) एक मुअज़िज़ फरिश्ता (जिबरील की ज़बान का पैग़ाम है
अत-तकवीरकुरान सूची
29आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अत-तकवीर 17

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Saturday, October 3, 2026

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