Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حَافِظٌ: रक्षक, निगरानी करने वाला फ़रिश्ता।
- لَمَّا: यहाँ "إِلَّا" के अर्थ में है, अर्थात "अवश्य ही" या "निश्चित रूप से"।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सत्य को बयान किया है कि इस ब्रह्मांड में कोई भी प्राणी बेखबर या आज़ाद नहीं है। हर आत्मा पर अल्लाह की ओर से नियुक्त एक रक्षक फ़रिश्ता तैनात है, जो उसके हर अच्छे और बुरे कर्म को दर्ज कर रहा है। यह फ़रिश्ता हर पल, हर लम्हा इंसान के साथ रहता है और उसकी सभी गतिविधियों को लिखता है।
यह बात इंसान के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है और एक बड़ी खुशखबरी भी। चेतावनी इसलिए कि हमारा हर काम, हर बात, हर विचार किसी न किसी के सामने है, और हमें इसका हिसाब देना होगा। खुशखबरी इसलिए कि हमारे अच्छे कर्म भी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि उन्हें संरक्षित किया जा रहा है, और क़यामत के दिन हमें उनका पूरा बदला मिलेगा।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को अपने अंदर यह एहसास पैदा करना चाहिए कि वह हर समय अल्लाह की निगरानी में है। जब यह एहसास दिल में गहरा हो जाए, तो इंसान गुनाहों से दूर रहता है और नेक कामों की ओर बढ़ता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह का करीबी बनाती है और उसे जीवन की असली सफलता दिलाती है।
इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है। जिस तरह हर कर्म को दर्ज किया जा रहा है, उसी तरह क़यामत के दिन हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा। कोई भी अच्छा काम छोटा नहीं है, और कोई भी बुरा काम छिपा नहीं रहेगा। यही वह दिन होगा जब हर इंसान अपने किए हुए कर्मों को सामने पाएगा, और अल्लाह की रहमत से नेक लोग जन्नत में दाखिल होंगे और बुरे लोग अपने अंजाम को पाएंगे।
इसलिए, प्यारे भाईयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को इस एहसास के साथ जिएं कि हम पर अल्लाह की निगरानी है। हर काम में ईमानदारी, हर रिश्ते में सच्चाई और हर हाल में अल्लाह की इबादत को अपनाएं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में भी सुकून देगा और आख़िरत में भी कामयाबी दिलाएगा। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 2-6 — सूरा अत-तारिक़
अनुवाद — अत-तारिक़ 4
सूरा अत-तारिक़ आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इस बात की क़सम) कि कोई शख़्श ऐसा नहीं जिस…सूरा आयत 4/17 — सूरा अत-तारिक़ الطارق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तारिक़ सुनें, सूरा अत-तारिक़ अनुवाद, सूरा अत-तारिक़ mp3, सूरा अत-तारिक़ pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अत-तारिक़
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


