अल-फज्र · 14/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
إِنَّ رَبَّكَ لَبِالْمِرْصَادِ ۝١٤
Inna Rabbaka labil mirsaad
📖 हिंदी अर्थ
बेशक तुम्हारा परवरदिगार ताक में है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • बिल-मिर्साद (بِالْمِرْصَادِ): अर्थात निगरानी में है, देख-भाल कर रहा है, किसी की भी गतिविधि से बेखबर नहीं है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! तुम्हारा रब हर पल, हर लम्हा अपने बंदों की निगरानी में है। वह देखता और सुनता है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है—ना छोटी, ना बड़ी। वह उन लोगों की राह देख रहा है जो उसकी नाफ़रमानी करते हैं, जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, जो कमज़ोरों पर ज़ुल्म करते हैं और अपनी सरकशी में हद से गुज़र जाते हैं। वह उन्हें ढील देता है, मोहलत देता है, लेकिन जब पकड़ता है, तो ऐसी पकड़ पकड़ता है जो बेहद सख्त और दर्दनाक होती है—एक ऐसे ज़बरदस्त और क़ादिर हाकिम की पकड़ जो किसी को भी बच निकलने का मौक़ा नहीं देता।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला का इंसाफ़ बिल्कुल सटीक है। वह हर अच्छे काम को देखता है और हर बुरे काम को भी। जो नेकी करेगा, उसे जन्नत का इनाम मिलेगा, और जो बुराई करेगा, उसे जहन्नुम की सज़ा का सामना करना पड़ेगा। यह कोई आम निगरानी नहीं, बल्कि पूरे इंसाफ़ के साथ कर्मों का हिसाब लेने की तैयारी है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि हम अकेले हैं या हमारे काम छिपे हैं। अल्लाह हर वक़्त हमें देख रहा है। यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक खुशखबरी भी—चेतावनी इसलिए कि हम गुनाहों से बचें, और खुशखबरी इसलिए कि हमें यकीन हो कि ज़ालिम चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। और जो मज़लूम हैं, उनके लिए यह तसल्ली है कि उनका रब उनके हाल पर नज़र रखे हुए है और इंसाफ़ का वादा करता है।

तो ऐ बंदे! अपने रब के सामने अपने आप को हाज़िर समझ, अपने अमल को सुधार, और याद रख—तू चाहे जहाँ भी हो, तेरा रब तेरे साथ है, तेरी हर हरकत पर निगाह रखता है। यही वह हक़ीक़त है जो इंसान को सीधी राह पर चलाती है और उसे अल्लाह की रहमत का हक़दार बनाती है।



📜 आयत 12-16 — अल-फज्र

12فَأَكْثَرُوا فِيهَا الْفَسَادَ
और उनमें बहुत से फ़साद फैला रखे थे
13فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ
तो तुम्हारे परवरदिगार ने उन पर अज़ाब का कोड़ा लगाया
14إِنَّ رَبَّكَ لَبِالْمِرْصَادِ
बेशक तुम्हारा परवरदिगार ताक में है
15فَأَمَّا الْإِنسَانُ إِذَا مَا ابْتَلَاهُ رَبُّهُ فَأَكْرَمَهُ وَنَعَّمَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَكْرَمَنِ
लेकिन इन्सान जब उसको उसका परवरदिगार (इस तरह) आज़माता है कि उसको इज्ज़त व नेअमत देता है, तो कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे इज्ज़त दी है
16وَأَمَّا إِذَا مَا ابْتَلَاهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَهَانَنِ
मगर जब उसको (इस तरह) आज़माता है कि उस पर रोज़ी को तंग कर देता है बोल उठता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे ज़लील किया
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अनुवाद — अल-फज्र 14

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Tuesday, August 18, 2026

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