अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ابْتَلَاهُ: उसकी परीक्षा ली
- فَأَكْرَمَهُ: उसे सम्मानित किया
- وَنَعَّمَهُ: उसे सुख-समृद्धि प्रदान की
- رَبِّي أَكْرَمَنِ: मेरे रब ने मुझे सम्मानित किया
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फरमाता है कि इंसान की फितरत (प्रकृति) ही ऐसी है कि जब उसका रब उसे धन-दौलत, संतान, प्रतिष्ठा और आराम-आसाइश जैसी नेमतें देकर परीक्षा लेता है, और उस पर अपनी रहमतें बरसाता है, तो वह तुरंत यह समझ बैठता है कि यह सब उसकी अपनी खूबियों और अल्लाह के यहाँ उसकी विशेष इज़्ज़त की वजह से है। वह घमंड में आकर कहता है: "मेरे रब ने मुझे सम्मानित किया है।"
यानी वह यह भूल जाता है कि यह नेमतें अल्लाह की ओर से एक इम्तिहान (परीक्षा) हैं, न कि उसकी काबिलियत का इनाम। वह यह नहीं सोचता कि अल्लाह जिसे चाहता है रिज़्क़ देता है और जिससे चाहता है रोक लेता है। यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी और हिकमत से होता है, न कि उसकी ज़ाती खूबी की वजह से।
यह आयत हमें सिखाती है कि नेमतें अल्लाह की तरफ से एक अमानत और परीक्षा हैं। जब अल्लाह हमें नेमतें देता है, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि यह अल्लाह की फज़ल (कृपा) है, न कि हमारी अपनी काबिलियत। घमंड और अहंकार इंसान को अल्लाह की नेमतों की कद्र करने से महरूम कर देता है।
याद रखिए! अल्लाह की नेमतें किसी की इज़्ज़त का सबूत नहीं हैं और न ही मुसीबतें किसी की बेइज़्ज़ती का सबूत हैं। असली इज़्ज़त तो अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) और उसके दीन पर साबित क़दम रहने में है। जो इंसान नेमत पाकर शुक्र करता है और मुसीबत में सब्र करता है, वही अल्लाह के यहाँ सच्चा इज़्ज़त वाला है।
अल्लाह हमें नेमतों की कद्र करने और उसका शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 13-17 — अल-फज्र
अनुवाद — अल-फज्र 15
सूरा अल-फज्र आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लेकिन इन्सान जब उसको उसका परवरदिगार (इस तरह) आज़माता है…सूरा आयत 15/30 — अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फज्र सुनें, अल-फज्र अनुवाद, अल-फज्र mp3, अल-फज्र pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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