अत-तौबा · 126/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
أَوَلَا يَرَوْنَ أَنَّهُمْ يُفْتَنُونَ فِي كُلِّ عَامٍ مَّرَّةً أَوْ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ لَا يَتُوبُونَ وَلَا هُمْ يَذَّكَّرُونَ ۝١٢٦
Awalaa yarawna annahum yuftanoona fee kulli `aamim marratan aw marrataini summa laa yatooboona wa laa hum yazzakkkaroon
📖 हिंदी अर्थ
क्या वह लोग (इतना भी) नहीं देखते कि हर साल एक मरतबा या दो मरतबा बला में मुबितला किए जाते हैं फिर भी न तो ये लोग तौबा ही करते हैं और न नसीहत ही मानते हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُفْتَنُونَ: उन्हें परीक्षा में डाला जाता है, उन्हें सताया जाता है, या उनकी परीक्षा ली जाती है।
  • يَذَّكَّرُونَ: वे सीख लेते हैं, नसीहत पकड़ते हैं, या याद दिलाए जाने पर ध्यान देते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

क्या ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) यह नहीं देखते कि उन्हें हर साल एक या दो बार परीक्षा में डाला जाता है? अल्लाह उन्हें कभी अकाल और तंगी के ज़रिए, कभी बीमारी के ज़रिए, और कभी उनके छिपे हुए नफ़ाक़ (पाखंड) को उजागर करके आज़माता है। यह सब इसलिए होता है ताकि उनका असली चेहरा लोगों के सामने आ जाए और वे अपनी गलतियों से सबक़ सीखें। लेकिन इन सबके बावजूद, वे न तो अपने कुफ़्र और नफ़ाक़ से तौबा करते हैं, और न ही इन आज़माइशों से कोई सबक़ सीखते हैं। वे हर बार परीक्षा में असफल होते हैं, फिर भी उनके दिल सख्त बने रहते हैं और वे अल्लाह की निशानियों से आँखें बंद किए रहते हैं। यह उनकी हालत की बड़ी तरस खाने वाली बात है कि अल्लाह उन्हें बार-बार मौक़ा देता है, लेकिन वे हर बार उसे ठुकरा देते हैं।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों को मुसीबतों और परीक्षाओं के ज़रिए जगाता है, ताकि वे अपनी गलतियों से बाज़ आएं। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हमें सज़ा देने से पहले आगाह करता है।
  2. हर मुसीबत या परेशानी में एक सबक़ छिपा होता है। अगर हम उस पर ग़ौर करें, तो यह हमारे लिए आध्यात्मिक तरक़्क़ी का ज़रिया बन सकती है।
  3. तौबा (पश्चाताप) का दरवाज़ा हमेशा खुला है। चाहे हम कितनी भी गलतियाँ कर लें, अल्लाह हमें मौक़ा देता है कि हम उसकी ओर लौटें। यह हमारे लिए उम्मीद की बड़ी ख़बर है।
  4. यह आयत हमें दिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है—वह उन्हें बार-बार आज़माता है ताकि वे सीधे रास्ते पर आएं, लेकिन अगर वे नहीं सीखते, तो यह उनकी अपनी बदकिस्मती है।
  5. एक मोमिन को चाहिए कि वह हर हालत में अल्लाह की तरफ़ ध्यान दे और अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में उसकी रहनुमाई तलाश करे, ताकि वह उन लोगों में से न हो जो नसीहत के बावजूद बेख़बर रहते हैं।


📜 आयत 124-128 — अत-तौबा

124وَإِذَا مَا أُنزِلَتْ سُورَةٌ فَمِنْهُم مَّن يَقُولُ أَيُّكُمْ زَادَتْهُ هَٰذِهِ إِيمَانًا ۚ فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا فَزَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَهُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
और जब कोई सूरा नाज़िल किया गया तो उन मुनाफिक़ीन में से (एक दूसरे से) पूछता है कि भला इस सूरे ने तुममें से किसी का ईमान बढ़ा दिया तो जो लोग ईमान ला चुके हैं उनका तो इस सूरे ने ईमान बढ़ा दिया और वह वहां उसकी ख़ुशियाँ मनाते है
125وَأَمَّا الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَتْهُمْ رِجْسًا إِلَىٰ رِجْسِهِمْ وَمَاتُوا وَهُمْ كَافِرُونَ
मगर जिन लोगों के दिल में (निफाक़ की) बीमारी है तो उन (पिछली) ख़बासत पर इस सूरो ने एक ख़बासत और बढ़ा दी और ये लोग कुफ़्र ही की हालत में मर गए
126أَوَلَا يَرَوْنَ أَنَّهُمْ يُفْتَنُونَ فِي كُلِّ عَامٍ مَّرَّةً أَوْ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ لَا يَتُوبُونَ وَلَا هُمْ يَذَّكَّرُونَ
क्या वह लोग (इतना भी) नहीं देखते कि हर साल एक मरतबा या दो मरतबा बला में मुबितला किए जाते हैं फिर भी न तो ये लोग तौबा ही करते हैं और न नसीहत ही मानते हैं
127وَإِذَا مَا أُنزِلَتْ سُورَةٌ نَّظَرَ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ هَلْ يَرَاكُم مِّنْ أَحَدٍ ثُمَّ انصَرَفُوا ۚ صَرَفَ اللَّهُ قُلُوبَهُم بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
और जब कोई सूरा नाज़िल किया गया तो उसमें से एक की तरफ एक देखने लगा (और ये कहकर कि) तुम को कोई मुसलमान देखता तो नहीं है फिर (अपने घर) पलट जाते हैं (ये लोग क्या पलटेगें गोया) ख़ुदा ने उनके दिलों को पलट दिया है इस सबब से कि ये बिल्कुल नासमझ लोग हैं
128لَقَدْ جَاءَكُمْ رَسُولٌ مِّنْ أَنفُسِكُمْ عَزِيزٌ عَلَيْهِ مَا عَنِتُّمْ حَرِيصٌ عَلَيْكُم بِالْمُؤْمِنِينَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
लोगों तुम ही में से (हमारा) एक रसूल तुम्हारे पास आ चुका (जिसकी शफ़क्क़त (मेहरबानी) की ये हालत है कि) उस पर शाक़ (दुख) है कि तुम तकलीफ उठाओ और उसे तुम्हारी बेहूदी का हौका है ईमानदारो पर हद दर्जे रफ़ीक़ मेहरबान हैं
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
126आयत

अनुवाद — अत-तौबा 126

सूरा अत-तौबा आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या वह लोग (इतना भी) नहीं देखते कि हर साल…

सूरा आयत 126/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए