अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَظَرَ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ: एक-दूसरे की ओर देखना, आँखों से इशारे करना।
- هَلْ يَرَاكُم مِّنْ أَحَدٍ: क्या कोई तुम्हें देख रहा है?
- انصَرَفُوا: वहाँ से चले गए, मजलिस छोड़ दी।
- صَرَفَ اللَّهُ قُلُوبَهُم: अल्लाह ने उनके दिलों को (हिदायत से) फेर दिया।
- لَا يَفْقَهُونَ: वे समझते नहीं, न तो समझते हैं और न ही विचार करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह की ओर से कोई सूरा उतरती है जिसमें मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की हालत और उनके अंदरूनी हाल का ज़िक्र होता है, तो वे लोग शर्मिंदगी और ग़ुस्से से एक-दूसरे की ओर देखने लगते हैं। वे आपस में आँखों ही आँखों से इशारे करते हैं कि यह सूरा हमारे बारे में उतरी है। फिर वे डरते हुए कहते हैं: "क्या कोई (मोमिनीन में से) हमें देख रहा है?" अगर उन्हें लगता है कि कोई उन्हें नहीं देख रहा, तो वे चुपचाप मजलिस से उठकर चले जाते हैं, ताकि उनका पर्दाफ़ाश न हो और उनकी फ़ज़ीहत (रुसवाई) न हो।
अल्लाह ने उनके दिलों को हिदायत और ईमान से फेर दिया, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह की आयतों पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते। उनकी समझ में कमी है, वे सच्चाई को नहीं पहचानते और न ही उससे सबक़ लेते हैं। उनका यह व्यवहार — सूरा सुनते ही भाग खड़े होना — इस बात का सबूत है कि उनके दिलों में ईमान की कोई गुंजाइश नहीं बची, इसलिए अल्लाह ने भी उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया।
फ़ायदे (सीख):
- मुनाफ़िक़ों की पहचान: इस आयत से मालूम होता है कि मुनाफ़िक़ों की निशानी यह है कि जब अल्लाह की आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे बेचैन हो जाते हैं और उस मजलिस से भागने की कोशिश करते हैं। मोमिन का हाल इसके उलट होता है — वह क़ुरआन सुनकर सुकून पाता है और उस पर अमल करता है।
- समझ और विचार की अहमियत: अल्लाह ने मुनाफ़िक़ों को "لَا يَفْقَهُونَ" (न समझने वाले) कहा। इससे सीख मिलती है कि दीन को समझकर पढ़ना और उस पर ग़ौर करना बहुत ज़रूरी है। सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान लाना काफ़ी नहीं, बल्कि दिल से समझना और अमल करना ज़रूरी है।
- अल्लाह की पकड़: जो लोग हक़ से मुँह मोड़ते हैं और नबी (ﷺ) की मजलिस से भागते हैं, अल्लाह उनके दिलों को हिदायत से महरूम कर देता है। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जो हक़ को ठुकराता है, उसे हिदायत नहीं मिलती।
- सच्चे मोमिन की ख़ूबी: मोमिन वह है जो क़ुरआन की आयतों को सुनकर उससे सीख लेता है, अपनी ग़लतियों को सुधारता है और अल्लाह से डरता है। उसे किसी से छिपने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उसका दिल साफ़ और नीयत सच्ची होती है।
- अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़ना: यह आयत हमें सिखाती है कि हमें क़ुरआन से दूर नहीं भागना चाहिए, बल्कि उसकी तरफ़ आना चाहिए। क़ुरआन हमारे लिए रहमत और हिदायत है, और जो इसे अपनाता है, अल्लाह उसके दिल को रौशन कर देता है।
📜 आयत 125-129 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 127
सूरा अत-तौबा आयत 127 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब कोई सूरा नाज़िल किया गया तो उसमें से…सूरा आयत 127/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 125–129. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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