Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَالِدِينَ: सदैव रहने वाले, हमेशा के लिए ठहरने वाले।
- أَبَدًا: हमेशा, अनंत काल तक, जिसका कोई अंत न हो।
- أَجْرٌ عَظِيمٌ: बहुत बड़ा प्रतिफल, अपार इनाम।
व्याख्या:
यह आयत उन ईमानवालों के उस सुखद परिणाम का वर्णन कर रही है जो अपने जीवन में ईमान और सत्कर्मों पर स्थिर रहे। वे उन जन्नतों में सदैव रहेंगे—ऐसा ठहराव जिसका कोई अंत नहीं, कोई समाप्ति नहीं। उनकी यह अमर जीवन और निरंतर आनंद की स्थिति उनके उन अच्छे कर्मों का प्रतिफल है जो उन्होंने दुनिया की ज़िंदगी में अल्लाह के आदेशों का पालन करते हुए और उसकी मनाही से बचते हुए किए। अल्लाह ने उन्हें यह सम्मान इसलिए दिया कि उन्होंने अपने रब के सामने पूर्ण आज्ञाकारिता और ईमानदारी का प्रदर्शन किया।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उसके पास उन लोगों के लिए बहुत बड़ा प्रतिफल है जो उस पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे। यह प्रतिफल केवल दुनिया तक सीमित नहीं, बल्कि आख़िरत में उन्हें वह मिलेगा जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। यह अल्लाह की ओर से एक ऐसा उपहार है जो उसकी असीम दया और उदारता का प्रमाण है। इस आयत में "ख़ालिदीन" और "अबदन" दोनों शब्दों से ख़ुलूद (हमेशा रहने) को पुख़्ता किया गया है, ताकि कोई यह न समझे कि यह ठहराव सीमित है—बल्कि यह अनंत और अटल है।
फ़ायदे:
- इस आयत से मुसलमान को यह बात समझनी चाहिए कि दुनिया की ज़िंदगी के छोटे-से कर्मों का अंजाम आख़िरत में कितना बड़ा और अनंत हो सकता है। यह ईमानवाले के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है कि वह अपने अच्छे कामों में कभी ढील न करे।
- अल्लाह का वादा सच्चा है—उसने जो वादा किया है वह अवश्य पूरा होगा। इससे दिल को सुकून मिलता है कि हमारी मेहनत और अच्छे कर्म कभी बेकार नहीं जाते।
- यह आयत हमें सिखाती है कि असली सफलता दुनिया के अस्थायी सुखों में नहीं, बल्कि उस स्थायी जीवन में है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। इसलिए हमें अपनी प्राथमिकताएँ सही रखनी चाहिए।
- अल्लाह की रहमत और उसका इनाम इतना विशाल है कि उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। यह बात मुसलमान के दिल में अल्लाह के प्रति मोहब्बत और उसकी इबादत में लगन पैदा करती है।
📜 आयत 20-24 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 22
सूरा अत-तौबा आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग उन बाग़ों में हमेशा अब्दआलाबाद (हमेशा हमेशा)…सूरा आयत 22/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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