अत-तौबा · 21/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُم بِرَحْمَةٍ مِّنْهُ وَرِضْوَانٍ وَجَنَّاتٍ لَّهُمْ فِيهَا نَعِيمٌ مُّقِيمٌ ۝٢١
Yubashshiruhum Rabbuhum birahmatim minhu wa ridwaaninw wa Jannaatil lahum feehaa na`eemum muqeem
📖 हिंदी अर्थ
उनका परवरदिगार उनको अपनी मेहरबानी और ख़ुशनूदी और ऐसे (हरे भरे) बाग़ों की ख़ुशख़बरी देता है जिसमें उनके लिए दाइमी ऐश व (आराम) होगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُبَشِّرُهُمْ: उन्हें शुभ सूचना देता है।
  • رَحْمَةٍ: विशेष दया और करुणा।
  • رِضْوَانٍ: अल्लाह की प्रसन्नता, जिसके बाद कोई नाराज़गी नहीं।
  • نَعِيمٌ مُقِيمٌ: स्थायी और कभी समाप्त न होने वाला सुख-चैन।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने उन ईमानवाले बंदों को, जिन्होंने उसकी राह में हिजरत की और जिहाद किया, तीन महान चीज़ों की शुभ सूचना देता है:

पहली: उसकी ओर से विशेष दया — यह वह रहमत है जो उनके सारे गुनाहों को ढक देती है और उन्हें हर बुराई से बचाती है।

दूसरी: उसकी प्रसन्नता (रिज़वान) — यह सबसे बड़ी नेमत है, क्योंकि अल्लाह का किसी बंदे से प्रसन्न होना ही सबसे बड़ी सफलता है। यह ऐसी प्रसन्नता है जिसके बाद कभी नाराज़गी नहीं होगी।

तीसरी: ऐसे बाग़ (जन्नतें) जिनमें उनके लिए स्थायी सुख-चैन है — यानी ऐसा आनंद जो कभी खत्म नहीं होगा, न बदलेगा और न घटेगा। यह नेमत हमेशा-हमेशा रहेगी।

यह शुभ सूचना उन्हें इसी दुनिया में दी जाती है, ताकि उनके दिलों को सुकून मिले और वे अल्लाह की राह में और मज़बूती से डटे रहें।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह की रहमत और प्रसन्नता ईमानवालों के लिए सबसे बड़ी नेमत है, जो दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़कर है।
  2. यह आयत मोमिनों को खुशखबरी देती है कि उनकी मेहनत और कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी — अल्लाह उन्हें ऐसा इनाम देगा जो कभी खत्म नहीं होगा।
  3. जन्नत का नेमत स्थायी है, जबकि दुनिया की सारी नेमतें अस्थायी हैं — इसलिए बुद्धिमान वही है जो स्थायी चीज़ के लिए अस्थायी चीज़ को कुर्बान कर दे।
  4. अल्लाह की प्रसन्नता (रिज़वान) जन्नत से भी बड़ी नेमत है, क्योंकि यही वह चीज़ है जो जन्नत के सुख को और भी बढ़ा देती है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों को डराने के साथ-साथ उन्हें खुशखबरी भी देता है, ताकि उनके दिलों में उम्मीद और मुहब्बत बनी रहे।
🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अत-तौबा

19۞ أَجَعَلْتُمْ سِقَايَةَ الْحَاجِّ وَعِمَارَةَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ كَمَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَجَاهَدَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ لَا يَسْتَوُونَ عِندَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
क्या तुम लोगों ने हाजियों की सक़ाई (पानी पिलाने वाले) और मस्जिदुल हराम (ख़ानाए काबा की आबादियों को उस शख़्स के हमसर (बराबर) बना दिया है जो ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत के दिन पर ईमान लाया और ख़ुदा के राह में जेहाद किया ख़ुदा के नज़दीक तो ये लोग बराबर नहीं और खुदा ज़ालिम लोगों की हिदायत नहीं करता है
20الَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ أَعْظَمُ دَرَجَةً عِندَ اللَّهِ ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَائِزُونَ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (ख़ुदा के लिए) हिजरत एख्तियार की और अपने मालों से और अपनी जानों से ख़ुदा की राह में जिहाद किया वह लोग ख़ुदा के नज़दीक दर्जें में कही बढ़ कर हैं और यही लोग (आला दर्जे पर) फायज़ होने वाले हैं
21يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُم بِرَحْمَةٍ مِّنْهُ وَرِضْوَانٍ وَجَنَّاتٍ لَّهُمْ فِيهَا نَعِيمٌ مُّقِيمٌ
उनका परवरदिगार उनको अपनी मेहरबानी और ख़ुशनूदी और ऐसे (हरे भरे) बाग़ों की ख़ुशख़बरी देता है जिसमें उनके लिए दाइमी ऐश व (आराम) होगा
22خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और ये लोग उन बाग़ों में हमेशा अब्दआलाबाद (हमेशा हमेशा) तक रहेंगे बेशक ख़ुदा के पास तो बड़ा बड़ा अज्र व (सवाब) है
23يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا آبَاءَكُمْ وَإِخْوَانَكُمْ أَوْلِيَاءَ إِنِ اسْتَحَبُّوا الْكُفْرَ عَلَى الْإِيمَانِ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِّنكُمْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ
ऐ ईमानदारों अगर तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारे (बहन) भाई ईमान के मुक़ाबले कुफ़्र को तरजीह देते हो तो तुम उनको (अपना) ख़ैर ख्वाह (हमदर्द) न समझो और तुममें जो शख़्स उनसे उलफ़त रखेगा तो यही लोग ज़ालिम है
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
21आयत

अनुवाद — अत-तौबा 21

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Tuesday, August 18, 2026

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