अत-तौबा · 95/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
سَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَكُمْ إِذَا انقَلَبْتُمْ إِلَيْهِمْ لِتُعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ فَأَعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ إِنَّهُمْ رِجْسٌ ۖ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ ۝٩٥
Sa yahlifoona billaahi lakum izanqalabtum ilaihim litu`ridoo `anhum fa a`ridoo `anhum innahum rijsunw wa maawaahum jahannamu jazaaa `ambimaa kaanoo yaksiboon
📖 हिंदी अर्थ
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَيَحْلِفُونَ – वे क़समें खाएँगे
  • انقَلَبْتُمْ – तुम लौटोगे (जिहाद से वापस आओगे)
  • لِتُعْرِضُوا عَنْهُمْ – ताकि तुम उन्हें छोड़ दो (उनकी मलामत न करो)
  • رِجْسٌ – नापाक, गंदे (बातिनी खबीसियत वाले)
  • مَأْوَاهُمْ – उनका ठिकाना और आश्रय स्थल
  • جَزَاءً – बदला, सज़ा के तौर पर

तफ़सीर:

ऐ ईमानवालो! जब तुम जिहाद से लौटकर इन मुनाफ़िक़ों के पास पहुँचोगे, तो ये लोग तुम्हारे सामने अल्लाह की क़समें खाकर अपने पीछे रह जाने का बहाना बनाएँगे, ताकि तुम उन्हें माफ़ कर दो और उनकी सरज़निश (मलामत) न करो। लेकिन अल्लाह तआला तुम्हें हिदायत देता है कि तुम उनसे मुँह मोड़ लो और उन्हें छोड़ दो, क्योंकि ये लोग बातिन (अंदर) से नापाक और ख़बीस हैं। उनकी ज़ाहिरी माफ़ी की दरख़्वास्तें धोखा हैं। उनका असली ठिकाना आख़िरत में जहन्नम की आग है, और यह सज़ा उनके उन कर्मों का बदला है जो वे दुनिया में करते रहे — निफ़ाक़, झूठ, और गुनाह। उनके लिए दुनिया में तुम्हारी माफ़ी से कोई फ़ायदा नहीं, क्योंकि अल्लाह के पास उनका हिसाब बाक़ी है।

फ़ायदे:

  1. मुनाफ़िक़ों की पहचान यह है कि वे झूठी क़समें खाकर अपने गुनाहों को छिपाने की कोशिश करते हैं, इसलिए हर क़सम पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
  2. ईमानवालों को सिखाया गया कि नापाक लोगों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि उनकी सोहबत दिल को गंदा करती है और उनकी बातों पर यक़ीन करना नुक़सानदेह है।
  3. अल्लाह तआला का इंसाफ़ यह है कि हर कर्म का बदला ज़रूर मिलेगा — अच्छा हो या बुरा। यह हमें गुनाहों से बचने और नेकियों पर साबित क़दम रहने की तरग़ीब देता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि माफ़ी और दरगुज़र की हद भी होती है — जो लोग निफ़ाक़ पर मुसिर (अड़े) हों, उनसे बचना और उन्हें अल्लाह के हवाले कर देना ही बेहतर है।
  5. इस्लाम में पाकीज़गी (पवित्रता) को बहुत अहमियत दी गई है — दिल की पाकीज़गी ही असली पाकीज़गी है, और अल्लाह के नज़दीक वही लोग मुक़र्रब हैं जिनके अंदर सच्चाई और सफ़ाई हो।
🎧 सुनें

📜 आयत 93-97 — अत-तौबा

93۞ إِنَّمَا السَّبِيلُ عَلَى الَّذِينَ يَسْتَأْذِنُونَكَ وَهُمْ أَغْنِيَاءُ ۚ رَضُوا بِأَن يَكُونُوا مَعَ الْخَوَالِفِ وَطَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
94يَعْتَذِرُونَ إِلَيْكُمْ إِذَا رَجَعْتُمْ إِلَيْهِمْ ۚ قُل لَّا تَعْتَذِرُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكُمْ قَدْ نَبَّأَنَا اللَّهُ مِنْ أَخْبَارِكُمْ ۚ وَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
95سَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَكُمْ إِذَا انقَلَبْتُمْ إِلَيْهِمْ لِتُعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ فَأَعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ إِنَّهُمْ رِجْسٌ ۖ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
96يَحْلِفُونَ لَكُمْ لِتَرْضَوْا عَنْهُمْ ۖ فَإِن تَرْضَوْا عَنْهُمْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَرْضَىٰ عَنِ الْقَوْمِ الْفَاسِقِينَ
तुम्हारे सामने ये लोग क़समें खाते हैं ताकि तुम उनसे राज़ी हो (भी) जाओ तो ख़ुदा बदकार लोगों से हरगिज़ कभी राज़ी नहीं होगा
97الْأَعْرَابُ أَشَدُّ كُفْرًا وَنِفَاقًا وَأَجْدَرُ أَلَّا يَعْلَمُوا حُدُودَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
(ये) अरब के गॅवार देहाती कुफ्र व निफाक़ में बड़े सख्त हैं और इसी क़ाबिल हैं कि जो किताब ख़ुदा ने अपने रसूल पर नाज़िल फरमाई है उसके एहक़ाम न जानें और ख़ुदा तो बड़ा दाना हकीम है
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अनुवाद — अत-तौबा 95

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Tuesday, August 18, 2026

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