Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَحْلِفُونَ – वे क़समें खाते हैं
- لِتَرْضَوْا عَنْهُمْ – ताकि तुम उनसे राज़ी (प्रसन्न) हो जाओ
- الْفَاسِقِينَ – आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अवज्ञाकारी लोग
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमानवालों! ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) जो जिहाद से पीछे रह गए थे, जब तुम्हारे पास आते हैं तो झूठी क़समें खाकर अपने बहाने पेश करते हैं, ताकि तुम उनसे प्रसन्न हो जाओ और उनके बहानों को स्वीकार कर लो। वे केवल तुम्हारी खुशी और स्वीकृति चाहते हैं, जबकि उनका दिल ईमान से खाली है।
ऐ मोमिनों! उनकी इन क़समों से धोखा मत खाओ। भले ही तुम उनके झूठे बहानों से प्रसन्न हो जाओ, लेकिन याद रखो कि तुम्हारा राज़ी होना उनके लिए किसी काम का नहीं, क्योंकि अल्लाह उनसे राज़ी नहीं है। अल्लाह उन लोगों से कभी प्रसन्न नहीं होता जो उसकी आज्ञा से बाहर निकलकर नाफ़रमानी और फ़िस्क़ (अवज्ञा) पर डटे रहते हैं। उन्होंने कुफ़्र और निफ़ाक़ के रास्ते पर चलकर अल्लाह की नाराज़गी मोल ली है, और अल्लाह की नाराज़गी के बाद उनकी सज़ा अवश्यंभावी है।
इसलिए, तुम्हारा उनसे प्रसन्न होना अल्लाह की प्रसन्नता का विकल्प नहीं बन सकता। जिस पर अल्लाह का क्रोध है, उसके लिए तुम्हारी स्वीकृति कोई लाभ नहीं पहुँचा सकती। अल्लाह का फ़ैसला ही अंतिम है, और वह फ़ासिक़ों (अवज्ञाकारियों) से कभी राज़ी नहीं होगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- सच्चाई की कसौटी अल्लाह की रज़ा है, न कि लोगों की रज़ा – इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमारे कर्मों का मापदंड अल्लाह की प्रसन्नता होनी चाहिए, न कि केवल लोगों की स्वीकृति। जो काम अल्लाह को नापसंद है, उसे लोगों की खुशी के लिए करना बेकार है।
- मुनाफ़िक़ों की पहचान – मुनाफ़िक़ों की आदत होती है कि वे झूठी क़समें खाकर अपने बुरे कामों को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। ईमानवालों को चाहिए कि वे सतर्क रहें और केवल बाहरी बातों से धोखा न खाएँ।
- अल्लाह की नाराज़गी से बचना – यह आयत हमें डराती है कि फ़िस्क़ (अवज्ञा) पर अड़े रहना अल्लाह की नाराज़गी का कारण है। इसलिए हमें अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुरूप बनाना चाहिए।
- रज़ा-ए-इलाही की अहमियत – इस्लाम में सबसे बड़ी कामयाबी अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) प्राप्त करना है। यही सच्ची सफलता है, और इसी के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।
- धोखे से बचाव – यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे लोगों के दिखावे और झूठी क़समों से धोखा न खाएँ, बल्कि उनके अंदरूनी हाल और उनके कर्मों को देखें।
📜 आयत 94-98 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 96
सूरा अत-तौबा आयत 96 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम्हारे सामने ये लोग क़समें खाते हैं ताकि तुम उनसे…सूरा आयत 96/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 94–98. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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