अत-तौबा · 96/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
يَحْلِفُونَ لَكُمْ لِتَرْضَوْا عَنْهُمْ ۖ فَإِن تَرْضَوْا عَنْهُمْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَرْضَىٰ عَنِ الْقَوْمِ الْفَاسِقِينَ ۝٩٦
Yahlifoona lakum litardaw `anhum fa in tardaw `anhum fa innal laaha laa yardaa `anil qawmil faasiqeen
📖 हिंदी अर्थ
तुम्हारे सामने ये लोग क़समें खाते हैं ताकि तुम उनसे राज़ी हो (भी) जाओ तो ख़ुदा बदकार लोगों से हरगिज़ कभी राज़ी नहीं होगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْلِفُونَ – वे क़समें खाते हैं
  • لِتَرْضَوْا عَنْهُمْ – ताकि तुम उनसे राज़ी (प्रसन्न) हो जाओ
  • الْفَاسِقِينَ – आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अवज्ञाकारी लोग

तफ़सीर (व्याख्या):

हे ईमानवालों! ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) जो जिहाद से पीछे रह गए थे, जब तुम्हारे पास आते हैं तो झूठी क़समें खाकर अपने बहाने पेश करते हैं, ताकि तुम उनसे प्रसन्न हो जाओ और उनके बहानों को स्वीकार कर लो। वे केवल तुम्हारी खुशी और स्वीकृति चाहते हैं, जबकि उनका दिल ईमान से खाली है।

ऐ मोमिनों! उनकी इन क़समों से धोखा मत खाओ। भले ही तुम उनके झूठे बहानों से प्रसन्न हो जाओ, लेकिन याद रखो कि तुम्हारा राज़ी होना उनके लिए किसी काम का नहीं, क्योंकि अल्लाह उनसे राज़ी नहीं है। अल्लाह उन लोगों से कभी प्रसन्न नहीं होता जो उसकी आज्ञा से बाहर निकलकर नाफ़रमानी और फ़िस्क़ (अवज्ञा) पर डटे रहते हैं। उन्होंने कुफ़्र और निफ़ाक़ के रास्ते पर चलकर अल्लाह की नाराज़गी मोल ली है, और अल्लाह की नाराज़गी के बाद उनकी सज़ा अवश्यंभावी है।

इसलिए, तुम्हारा उनसे प्रसन्न होना अल्लाह की प्रसन्नता का विकल्प नहीं बन सकता। जिस पर अल्लाह का क्रोध है, उसके लिए तुम्हारी स्वीकृति कोई लाभ नहीं पहुँचा सकती। अल्लाह का फ़ैसला ही अंतिम है, और वह फ़ासिक़ों (अवज्ञाकारियों) से कभी राज़ी नहीं होगा।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. सच्चाई की कसौटी अल्लाह की रज़ा है, न कि लोगों की रज़ा – इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमारे कर्मों का मापदंड अल्लाह की प्रसन्नता होनी चाहिए, न कि केवल लोगों की स्वीकृति। जो काम अल्लाह को नापसंद है, उसे लोगों की खुशी के लिए करना बेकार है।
  2. मुनाफ़िक़ों की पहचान – मुनाफ़िक़ों की आदत होती है कि वे झूठी क़समें खाकर अपने बुरे कामों को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। ईमानवालों को चाहिए कि वे सतर्क रहें और केवल बाहरी बातों से धोखा न खाएँ।
  3. अल्लाह की नाराज़गी से बचना – यह आयत हमें डराती है कि फ़िस्क़ (अवज्ञा) पर अड़े रहना अल्लाह की नाराज़गी का कारण है। इसलिए हमें अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुरूप बनाना चाहिए।
  4. रज़ा-ए-इलाही की अहमियत – इस्लाम में सबसे बड़ी कामयाबी अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) प्राप्त करना है। यही सच्ची सफलता है, और इसी के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।
  5. धोखे से बचाव – यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे लोगों के दिखावे और झूठी क़समों से धोखा न खाएँ, बल्कि उनके अंदरूनी हाल और उनके कर्मों को देखें।
🎧 सुनें

📜 आयत 94-98 — अत-तौबा

94يَعْتَذِرُونَ إِلَيْكُمْ إِذَا رَجَعْتُمْ إِلَيْهِمْ ۚ قُل لَّا تَعْتَذِرُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكُمْ قَدْ نَبَّأَنَا اللَّهُ مِنْ أَخْبَارِكُمْ ۚ وَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
95سَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَكُمْ إِذَا انقَلَبْتُمْ إِلَيْهِمْ لِتُعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ فَأَعْرِضُوا عَنْهُمْ ۖ إِنَّهُمْ رِجْسٌ ۖ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
96يَحْلِفُونَ لَكُمْ لِتَرْضَوْا عَنْهُمْ ۖ فَإِن تَرْضَوْا عَنْهُمْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَرْضَىٰ عَنِ الْقَوْمِ الْفَاسِقِينَ
तुम्हारे सामने ये लोग क़समें खाते हैं ताकि तुम उनसे राज़ी हो (भी) जाओ तो ख़ुदा बदकार लोगों से हरगिज़ कभी राज़ी नहीं होगा
97الْأَعْرَابُ أَشَدُّ كُفْرًا وَنِفَاقًا وَأَجْدَرُ أَلَّا يَعْلَمُوا حُدُودَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
(ये) अरब के गॅवार देहाती कुफ्र व निफाक़ में बड़े सख्त हैं और इसी क़ाबिल हैं कि जो किताब ख़ुदा ने अपने रसूल पर नाज़िल फरमाई है उसके एहक़ाम न जानें और ख़ुदा तो बड़ा दाना हकीम है
98وَمِنَ الْأَعْرَابِ مَن يَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ مَغْرَمًا وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ الدَّوَائِرَ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और कुछ गॅवार देहाती (ऐसे भी हैं कि जो कुछ ख़ुदा की) राह में खर्च करते हैं उसे तावान (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में (ज़माने की) गर्दिशों के मुन्तज़िर (इन्तेज़ार में) हैं उन्हीं पर (ज़माने की) बुरी गर्दिश पड़े और ख़ुदा तो सब कुछ सुनता जानता है
अत-तौबाकुरान सूची
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अनुवाद — अत-तौबा 96

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Tuesday, August 18, 2026

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