ya`taziroona ilaikum izaa raja`tum ilaihim; qul laa ta`taziroo lan nu`mina lakum qad nabba annal laahu min akhbaarikum; wa sa yaral laahu `amalakum wa Rasooluhoo suma turaddoona ilaa `Aalimil Ghaibi washshahaadati fa yunabbi`ukum bimaa kuntum ta`maloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
جب تم ان کے پاس واپس جاؤ گے تو تم سے عذر کریں گے تم کہنا کہ مت عذر کرو ہم ہرگز تمہاری بات نہیں مانیں گے خدا نے ہم کو تمہارے سب حالات بتا دیئے ہیں۔ اور ابھی خدا اور اس کا رسول تمہارے عملوں کو (اور) دیکھیں گے پھر تم غائب وحاضر کے جاننے والے (خدائے واحد) کی طرف لوٹائے جاؤ گے اور جو عمل تم کرتے رہے ہو وہ سب تمہیں بتائے گا
عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ – छिपे और प्रकट (सब कुछ) जानने वाला
विस्तृत व्याख्या:
हे ईमानवालों! जब तुम (ग़ज़वा-ए-तबूक) से लौटकर उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के पास पहुँचते हो, जो जिहाद से पीछे रह गए थे, तो वे तुम्हारे सामने झूठे बहाने पेश करते हैं और अपने पीछे रह जाने को किसी न किसी तरह उचित ठहराने की कोशिश करते हैं। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि आप उनसे कह दें: "अपने बहाने मत बनाओ, हम तुम्हारी बातों को कभी सच नहीं मानेंगे, क्योंकि अल्लाह ने हमें तुम्हारे हालात से अवगत करा दिया है और तुम्हारे दिलों के भेद हम पर खोल दिए हैं।"
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि अब आगे चलकर अल्लाह और उसका रसूल देखेंगे कि तुम अपने नफ़ाक़ (पाखंड) पर क़ायम रहते हो या सच्ची तौबा करते हो। तुम्हारे अमल (कर्म) दुनिया में लोगों के सामने आ जाएँगे। फिर मरने के बाद तुम सबको उस ज़ात की ओर लौटाया जाएगा जो छिपे और खुले सब कुछ जानती है। वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या-क्या करते रहे, और उसी के अनुसार तुम्हें बदला देगा। इसलिए अब भी मौक़ा है कि अपनी ज़िंदगी को सुधार लो और नेक कामों की तरफ़ रुजू कर लो।
शिक्षाएँ और फ़ायदे:
सच्चाई की पहचान: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह अपने नबी को मुनाफ़िक़ों के हाल से अवगत करा देता है, इसलिए झूठे बहाने और धोखेबाज़ी किसी के काम नहीं आती। एक मुसलमान को हमेशा सच्चाई पर चलना चाहिए।
अल्लाह की निगरानी: हमारे हर अमल पर अल्लाह और उसके रसूल की नज़र है। यह एहसास इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ़ प्रेरित करता है।
तौबा का दरवाज़ा: अल्लाह ने मुनाफ़िक़ों को भी तौबा का मौक़ा दिया। यह हमें सिखाता है कि चाहे कितनी ही बड़ी ग़लती हो, अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और सच्चे दिल से तौबा करनी चाहिए।
आख़िरत पर ईमान: यह आयत हमें याद दिलाती है कि एक दिन हम सबको अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, जो हर छोटे-बड़े अमल से वाक़िफ़ है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है।
समुदाय में पारदर्शिता: मुसलमानों को चाहिए कि वे आपस में सच्चाई और स्पष्टता से पेश आएँ, न कि बहानेबाज़ी और धोखे से। इससे समाज में भरोसा और भाईचारा बढ़ता है।
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
और न उन्हीं लोगों पर कोई इल्ज़ाम है जो तुम्हारे पास आए कि तुम उनके लिए सवारी बाहम पहुँचा दो और तुमने कहा कि मेरे पास (तो कोई सवारी) मौजूद नहीं कि तुमको उस पर सवार करूँ तो वह लोग (मजबूरन) फिर गए और हसरत (व अफसोस) उसे उस ग़म में कि उन को ख़र्च मयस्सर न आया
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।