अश-शम्स · 6/15
अनुवाद उच्चारण — अश-शम्स
وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا ۝٦
Wal ardi wa maa tahaahaa
📖 हिंदी अर्थ
और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • طَحَاهَا (तहाहा): उसे बिछाया, फैलाया और समतल किया।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस पवित्र आयत में सूर्य, चंद्रमा, दिन, रात, आसमान और ज़मीन की क़समें खाई हैं। इस आयत में ख़ास तौर पर ज़मीन का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि उसने ज़मीन को बिछाया और फैलाया, ताकि इंसान उस पर आराम से रह सके, चल-फिर सके, खेती कर सके और अपनी ज़रूरतें पूरी कर सके।

यह ज़मीन जिस पर हम चलते हैं, जिस पर हम अपने घर बनाते हैं, जिससे हमें अनाज, फल और पानी मिलता है—यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। अल्लाह ने इसे गोल होते हुए भी इस तरह बिछाया कि यह हमारे लिए एक आरामदेह बिस्तर बन गई। पहाड़ों को मेखों की तरह गाड़ दिया ताकि यह हिले नहीं, नदियाँ और झरने जारी किए, और इसमें तरह-तरह की चीज़ें पैदा कीं।

जब हम इस ज़मीन को देखते हैं—इसकी हरियाली, इसके पहाड़, इसके समुद्र, इसकी वादियाँ—तो हमें अपने रब की क़ुदरत और उसकी रहमत का अंदाज़ा होता है। यही ज़मीन हमें याद दिलाती है कि जिस अल्लाह ने इसे बिछाया है, वही हमें क़यामत के दिन दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। जिस तरह वह बंजर ज़मीन को बारिश से ज़िंदा कर देता है, उसी तरह वह मुर्दों को भी ज़िंदा करेगा।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह ज़मीन हमारे लिए अल्लाह की मेहरबानी की निशानी है। हमें चाहिए कि इस पर चलते हुए अल्लाह का शुक्र अदा करें, इससे जुड़ी हुई नेमतों को पहचानें और अपने रब की इबादत में लगे रहें। जो इंसान इन निशानियों से सबक़ हासिल करता है, वह अपने रब की तरफ़ रुजू करता है और उसकी रहमत का हक़दार बनता है। अल्लाह हम सबको इन निशानियों से हिदायत हासिल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 4-8 — अश-शम्स

4وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا
और रात की जब उसे ढाँक ले
5وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا
और आसमान की और जिसने उसे बनाया
6وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا
और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया
7وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया
8فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا
फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया
अश-शम्सकुरान सूची
15आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अश-शम्स 6

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Tuesday, August 18, 2026

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