अश-शम्स · 7/15
अनुवाद उच्चारण — अश-शम्स
وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا ۝٧
Wa nafsinw wa maa sawwaahaa
📖 हिंदी अर्थ
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَفْسٍ: आत्मा, मानवीय रूह।
  • مَا سَوَّاهَا: उसे (आत्मा को) सही और समान रूप से बनाया, उसकी रचना को अच्छी तरह से संतुलित और व्यवस्थित किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में आत्मा की क़सम खाई है और उसकी उस रचना की क़सम खाई है जिसमें उसे पूर्ण संतुलन और व्यवस्था दी गई। यहाँ "نَفْسٍ" का उल्लेख अनिश्चित रूप में किया गया है, जो सभी आत्माओं को शामिल करता है — चाहे वे नेक हों या बुरी, सभी मानवीय आत्माएँ। अल्लाह ने हर आत्मा को एक विशेष प्रकृति, क्षमताएँ, और झुकाव के साथ पैदा किया, और उसे अच्छाई और बुराई दोनों को पहचानने की शक्ति दी। यह रचना अत्यंत सटीक और उद्देश्यपूर्ण है — न कोई कमी, न कोई अतिशयता। आत्मा को अच्छाई की ओर जाने की ताकत दी गई और बुराई से बचने की समझ भी। यह क़सम इसलिए खाई गई ताकि इंसान समझे कि उसकी आत्मा की यह संतुलित रचना एक महान नियामत है, और उसे इसका सही उपयोग करना चाहिए।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी आत्मा अल्लाह की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है। जिस अल्लाह ने हमें इतनी अच्छी तरह से बनाया, उसने हमें अकेला नहीं छोड़ा — उसने हमें राह दिखाई, हमारे अंदर अच्छे और बुरे की पहचान रखी। यह हमारे लिए एक बड़ा सम्मान है कि हमारी आत्मा को इतनी उच्च क्षमता दी गई है। हमें चाहिए कि हम अपनी इस आत्मा को गुनाहों से पाक रखें, उसे अच्छाई से आबाद करें, और अपने रब की इबादत में लगाएँ। जब हम अपनी आत्मा को पवित्र रखेंगे, तो हम दुनिया में सुकून पाएँगे और आख़िरत में कामयाब होंगे। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अश-शम्स

5وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا
और आसमान की और जिसने उसे बनाया
6وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا
और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया
7وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया
8فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا
फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया
9قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا
(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ
अश-शम्सकुरान सूची
15आयत
मक्कीRevelation
7आयत

अनुवाद — अश-शम्स 7

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Tuesday, August 18, 2026

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