अश-शम्स · 9/15
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शम्स
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا ۝٩
Qad aflaha man zakkaahaa
📖 हिंदी अर्थ
(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفْلَحَ – सफल हुआ, कामयाब हुआ, अपनी मंज़िल को पा लिया।
  • زَكَّاهَا – उसे (नफ़्स को) पाक-साफ़ किया, उसे अच्छाइयों से सजाया और बुराइयों से दूर किया।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में उस महान सत्य को बयान किया है जो इंसान की कामयाबी और नाकामयाबी की कुंजी है। अल्लाह ने हर इंसान की रूह को पैदा किया और उसे अच्छाई और बुराई दोनों की पहचान दी, यानी उसे यह बताया कि कौन सा रास्ता भलाई का है और कौन सा बुराई का। अब इसके बाद इंसान की असली कामयाबी इसी में है कि वह अपने नफ़्स को पाक करे, उसे गुनाहों की गंदगी से बचाए और उसे नेकियों से सजाए।

यह आयत हमें बताती है कि सच्ची कामयाबी दौलत, शोहरत या दुनिया की चीज़ों में नहीं है, बल्कि असली कामयाबी यह है कि इंसान अपनी रूह को पवित्र रखे। जिसने अपने दिल को ईमान, अच्छे अख़लाक़ और नेक आमाल से सजाया, उसने अपने नफ़्स को ज़कात (पवित्रता) दी और वही सच्चे अर्थों में कामयाब हुआ। वह दुनिया में भी इत्मिनान और सुकून पाता है और आख़िरत में भी उसके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है।

अल्लाह ने इस आयत में यह भी बताया कि उसने हर इंसान को यह ताक़त दी है कि वह अपने नफ़्स को सुधार सकता है। कोई भी इंसान इस हालत में पैदा नहीं हुआ कि वह बुरा ही है, बल्कि उसके अंदर अच्छाई और बुराई दोनों की क्षमता है। अब यह उसकी अपनी कोशिश है कि वह किस रास्ते को चुनता है। यही वह नुक़्ता है जहाँ इंसान की असली आज़माइश है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दिल की सफ़ाई पर सबसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। जिस तरह हम अपने शरीर को साफ़ रखते हैं, उसी तरह अपने दिल को भी गुनाहों, हसद, कीन और बुरे ख़यालात से साफ़ रखना चाहिए। नमाज़, रोज़ा, ज़िक्र, तिलावत और नेक कामों से दिल की सफ़ाई होती है। जो इंसान इन चीज़ों का ख़याल रखता है, वही दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

याद रखिए, अल्लाह ने हमें यह मौक़ा दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकें। हर सुबह एक नया मौक़ा है कि हम अपने नफ़्स को सुधारें और अल्लाह की राह में कदम बढ़ाएँ। जो लोग ऐसा करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी उनके लिए बेहतरीन इनाम तैयार है। यही वह कामयाबी है जिसके लिए हर समझदार इंसान को कोशिश करनी चाहिए।



📜 आयत 7-11 — सूरा अश-शम्स

7وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया
8فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا
फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया
9قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا
(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ
10وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّاهَا
और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा
11كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَاهَا
क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया,
अश-शम्सकुरान सूची
15आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अश-शम्स 9

सूरा अश-शम्स आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा…

सूरा आयत 9/15 — सूरा अश-शम्स الشمس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शम्स सुनें, सूरा अश-शम्स अनुवाद, सूरा अश-शम्स mp3, सूरा अश-शम्स pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए