अल-लैल · 12/21
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-लैल
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ ۝١٢
Inna `alainaa lal hudaa
📖 हिंदी अर्थ
हमें राह दिखा देना ज़रूर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنَّ عَلَيْنَا: यह हमारे ज़िम्मे है, हमारी ज़िम्मेदारी है।
  • لَلْهُدَى: सीधा रास्ता दिखाना, मार्गदर्शन करना, सत्य और असत्य का रास्ता स्पष्ट करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी बड़ी मेहरबानी और रहमत का ज़िक्र कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने बंदों को सीधा रास्ता दिखाएँ — वह रास्ता जो उन्हें जन्नत और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाए, और उस रास्ते से अलग करके दिखाएँ जो गुमराही और तबाही की तरफ ले जाता है। यानी अल्लाह ने अपने फज़ल (कृपा) और हिकमत (बुद्धिमत्ता) से हिदायत का रास्ता बिल्कुल साफ़ कर दिया है — हक़ और बातिल, नेकी और गुनाह, भलाई और बुराई — सब कुछ वाज़ेह कर दिया है।

यह अल्लाह की तरफ से एक बहुत बड़ी नेमत है कि उसने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसे रहनुमाई अता की। अब इंसान के पास अज़ाब और अंधेरे का कोई बहाना नहीं बचता। अल्लाह ने क़ुरआन, रसूलों और अक़्ल के ज़रिए हर उस चीज़ को स्पष्ट कर दिया जो इंसान को कामयाबी की राह पर ले जाती है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दीन कोई पहेली या रहस्य नहीं है, बल्कि एक रौशन रास्ता है। जो कोई इस रास्ते पर चलना चाहे, उसे आसानी से रास्ता मिल सकता है। अल्लाह ने हिदायत का दरवाज़ा हर उस बंदे के लिए खोल दिया है जो सच्चे दिल से उसे तलाश करता है।

और यह भी याद रखें कि हिदायत पाने के बाद इंसान की ज़िम्मेदारी है कि वह उस पर अमल करे। अल्लाह ने रास्ता दिखा दिया — अब चलना हमारे हाथ में है। जो अल्लाह की दिखाई हुई राह पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।

तो आओ, हम सब उस रौशन रास्ते को पहचानें, उस पर चलें, और उस नेमत का शुक्र अदा करें जो अल्लाह ने हमें दी — यानी हिदायत की नेमत। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 10-14 — सूरा अल-लैल

10فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَىٰ
तो हम उसे सख्ती (जहन्नुम) में पहुँचा देंगे,
11وَمَا يُغْنِي عَنْهُ مَالُهُ إِذَا تَرَدَّىٰ
और जब वह हलाक होगा तो उसका माल उसके कुछ भी काम न आएगा
12إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ
हमें राह दिखा देना ज़रूर है
13وَإِنَّ لَنَا لَلْآخِرَةَ وَالْأُولَىٰ
और आख़ेरत और दुनिया (दोनों) ख़ास हमारी चीज़े हैं
14فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّىٰ
तो हमने तुम्हें भड़कती हुई आग से डरा दिया
अल-लैलकुरान सूची
21आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अल-लैल 12

सूरा अल-लैल आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमें राह दिखा देना ज़रूर है

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Friday, October 2, 2026

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