Qul yaaa ayyuhan naasu in kuntum fee shakkkim min deenee falaa a`budul lazeena ta`budoona min doonil laahi wa laakin a`budul laahal lazee yatawaffaakum wa umirtu an akoona minal mu`mineen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
(اے پیغمبر) کہہ دو کہ لوگو اگر تم کو میرے دین میں کسی طرح کا شک ہو تو (سن رکھو کہ) جن لوگوں کی تم خدا کے سوا عبادت کرتے ہو میں ان کی عبادت نہیں کرتا۔ بلکہ میں خدا کی عبادت کرتا ہوں جو تمھاری روحیں قبض کرلیتا ہے اور مجھ کو یہی حکم ہوا ہے کہ ایمان لانے والوں میں ہوں
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
تَتَوَفَّاكُمْ: तुम्हें मृत्यु देना, तुम्हारी आत्माएँ क़ब्ज़ करना।
مِنَ الْمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वालों में से, अल्लाह पर विश्वास करने वालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए: "ऐ लोगों! यदि तुम मेरे दीन (इस्लाम) के सत्य होने में संदेह रखते हो, और यह सोचते हो कि शायद मैं अपने धर्म से विचलित हो जाऊँ, तो जान लो कि मैं कभी भी उन माबूदों की इबादत नहीं करूँगा जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो। ये मूर्तियाँ और झूठे देवता न तो कोई लाभ पहुँचा सकते हैं और न ही हानि। मैं तो केवल उस अल्लाह की इबादत करता हूँ जो तुम्हें मृत्यु देता है और तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ करता है। वही तुम्हारा सच्चा स्वामी और पालनहार है। मुझे यही आदेश दिया गया है कि मैं उसी पर ईमान लाऊँ और उसके आगे पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण कर दूँ। मुझसे कहा गया है कि मैं सच्चे ईमानवालों में से बनूँ, जो अल्लाह की एकता और उसके आदेशों पर दृढ़ता से विश्वास रखते हैं।"
यह आयत उस समय उतरी जब कुछ लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को उनके दीन से विचलित करने की कोशिश कर रहे थे और उनसे कह रहे थे कि हमारे देवताओं की पूजा करो। अल्लाह ने अपने नबी को स्पष्ट उत्तर देने का आदेश दिया कि मैं तुम्हारे झूठे माबूदों से कोई संबंध नहीं रखता, मेरी इबादत केवल उसी अल्लाह के लिए है जो जीवन और मृत्यु का स्वामी है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
सच्चे दीन पर दृढ़ता: यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चे मार्ग पर चलते हुए हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए। चाहे लोग हमें धमकाएँ या हमारा मज़ाक उड़ाएँ, हमें अपने ईमान पर स्थिर रहना चाहिए।
इबादत केवल अल्लाह की: हमारी सारी इबादतें, प्रार्थनाएँ और आशाएँ केवल अल्लाह से ही जुड़ी होनी चाहिए। किसी और से मदद माँगना या उसकी पूजा करना शिर्क है, जो सबसे बड़ा पाप है।
मृत्यु की याद: अल्लाह ने यहाँ मृत्यु का ज़िक्र किया है ताकि हमें याद दिलाया जाए कि हमें एक दिन इस दुनिया से जाना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है। यह हमें अच्छे कर्म करने और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
ईमानवालों में शामिल होने की कोशिश: हमें हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि हम सच्चे ईमानवालों में शामिल हों, जो अल्लाह पर पूर्ण विश्वास रखते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं। यही सफलता का मार्ग है।
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाज़िम है कि हम ईमान लाने वालों को भी बचा लें
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक्त तुम भी ज़ालिमों में (शुमार) होगें
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